ताज़ा समाचार
यूपी में पहले चरण का मतदान ख़त्म, रिकॉर्डतोड़ 60 फ़ीसदी वोटिंग। वोटिंग के दौरान सतह पर आई कांग्रेस की अंतर्कलह, पीएल पुनिया पर बोले बेनी वर्मा- वह आए हैं पंजाब से। मोदी को फिर पड़ी लताड़, 2002 के दंगे पर हाईकोर्ट ने कहा- सरकार के नाकारापन से बिगड़े हालात। कर्नाटक में महंगा पड़ा अश्लील वीडियो कांड, तीन मंत्रियों को देने पड़े इस्तीफ़े। पर्थ वन डे में भारत ने श्रीलंका को 4 विकेट से हराया.

Exclusive News

कॉमनवेल्थ में करप्शन!

Bookmark and Share
Tue Aug 10 2010 21:59:24 GMT+0530 (India Standard Time)

कॉमनवेल्थ खेल अब देश की नाक का सवाल है, लेकिन क्वीन्स बैटन के दिल्ली पहुंचने से पहले ही शेरा शर्मसार है। तैयारियों के दावे बारिश में धुल रहे हैं और अब करप्शन का कलंक किरकिरी का सबब है । लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि कॉमनवेल्थ में यह करोड़ों का गेम हमारी और आपकी जेब की कीमत पर हो रहा है।

करोड़ों-अरबों का यह खेल यमुना में फैले प्रदूषण से भी ज्यादा गंदा है। एक तरफ खेलों पर करप्शन का कलंक लग रहा है और दूसरी तरफ जेब पर भारी पड़ रही तैयारियां पूरा होने का नाम नहीं ले रही हैं। लिहाजा कॉमनवेल्थ गेम्स फेडरेशन के सीइओ माइक हूपर ने अब आईओए अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी को जमकर फटकार लगाई है। दूसरी तरफ, कॉमनवेल्थ गेम्स ऑर्गेनाइजिंग कमेटी के महासचिव ललित भनोट आज प्रेस कांफ्रेंस के बीच में से ही उठ गए। पत्रकारों ने जब उनसे कॉमनवेल्थ गेम्स के भ्रष्टाचार मामले पर सवाल पूछे, तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया कॉमनवेल्थ गेम्स महज दो महीने दूर हैं, लेकिन अब भी कई स्टेडियम तैयार नहीं। आलम यह है कि ऑर्गेनाइजिंग कमेटी को रविवार को जिन स्टेडियम को टेकओवर करना था वह उसने सिर्फ इसलिए नहीं किया, क्योंकि कल इतवार था।

सीपीडब्लूडी के मुताबिक, उसके स्टेडियम तैयार हैं, डीडीए भी कुछ ऐसा ही दावा कर रही है, लेकिन हकीकत हमेशा की तरह कुछ और ही है।
जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम जल जमाव से निजात नहीं।
यमुना स्पोर्ट्स कांप्लेक्स छत पर काफी काम बाकी, शो कोर्ट दस दिन में तैयार होगा। वुडेन फ्लोर को बदलने का काम चल रहा है।
कर्नी सिंह शूटिंग रेंज 50 मीटर रेंज में लीकेज अब तक ठीक नहीं।
एस पी मुखर्जी स्वीमिंग कांप्लेक्स दीवारों पर सीलन, छत पर पानी निकासी का काम चल रहा है।
आईजी स्टेडियम लैंडस्केपिंग और केबल का काम बाकी।
सीरीफोर्ट स्पोर्ट्स कांप्लेक्स दीवारों में सीलन, छत की मरम्मत चल रही है।
नेशनल स्टेडियम केबल का काम बाकी, मेनहोल तैयार हो रहे हैं।
गेम्स विलेज फ्लैट्स में फर्निशिंग का काम बाकी। अप्रोच रोड तैयार नहीं।

जवाहरलाल नेहरु स्टेडियम में खेल के मैदान के पास बने कमरों में वाटरलॉगिंग की समस्या अब भी दूर नहीं हुई है। यमुना स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में शो कोर्ट अब तक नहीं बना। इसके तैयार होने में कम से कम दस दिन लगेंगे। कांप्लेक्स में छत पर ड्रेनेज का काम चल रहा है। यहां वुडेन फ्लोरिंग का काम भी अब तक पूरा नहीं हुआ है। कर्नी सिंह शूटिंग रेंज में अब तक लीकेज पर काबू नहीं पाया जा सका है। एस पी मुखर्जी स्वीमिंग कांप्लेक्स की दीवारों पर अब भी सीलन है और छत पर पानी निकासी के लिए ड्रेनेज वर्क पर काम चल रहा है। इंदिरा गांधी स्टेडियम एंड वेलोड्रोम में काम करीब करीब पूरा हो चुका है, लेकिन लैंडस्केपिंग और केबलिंग का काम बाकी है। सीरीफोर्ट स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में फायर लाइन चेक करने के दौरान शुरू हुई सीलन की समस्या पर अब भी निजात नहीं पाया जा सका है। यहां छत की मरम्मत भी चल रही है। नेशनल स्टेडियम में केबलिंग और मेनहोल का काम अब तक बाकी है। गेम्स विलेज में फ्लैट्स तैयार हो गए हैं, लेकिन इनकी फर्निशिंग का काम अब तक पूरा नहीं हुआ। यहां तक पहुंचने वाले अप्रोच रोड भी अब तक बन कर तैयार नहीं हुए।

खेल पर जेब भारी

5 स्टेडियम बनाने का बजट 250% बढ़ा
1000 करोड़ से 2460 करोड़ रुपए हुआ
जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम
प्रस्तावित बजटखर्च हुआ
455 करोड़ रु961 करोड़ रु

कर्नी सिंह स्टेडियम
प्रस्तावित बजटखर्च हुआ
16 करोड़ रु149 करोड़ रु

इंदिरा गांधी स्टेडियम
प्रस्तावित बजटखर्च हुआ
271 करोड़ रु669 करोड़ रु

श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्टेडियम
प्रस्तावित बजटखर्च हुआ
145 करोड़ रु377 करोड़ रु

ध्यानचंद स्टेडियम
प्रस्तावित बजटखर्च हुआ
113 करोड़ रु302 करोड़ रु

कैसी होगी राजधानी दिल्ली मेहमान नवाज़ी?

आज यह सवाल हर किसी के मन में दौड़ रहा है। ख़ासकर हर रोज तैयारियों की खुलती पोल ने इस आशंका को और बढ़ा दिया है कि जो एक लाख पर्यटक दिल्ली पहुंचेंगे वे कहां ठहरेंगे। अगर राजधानी दिल्ली की बात करें, तो यहां 2000 होटलों को 31 जुलाई तक पूरी तरह तैयार हो जाना था, लेकिन पूरे हुए हैं सिर्फ 900 होटल। बार- बार तैयारियों की डेडलाइन बदलने के बाद भी सरकार को भरोसा है कि सब काम पूरा हो जाएगा। लेकिन हकीकत इस भरोसे के खिलाफ है। कॉमनवेल्थ खेलों के लिए बनाए जा रहे होटलों में से साठ फीसदी में अभी काम चल ही रहा है। यह हालत तब है जब इन होटलों में काम पूरा करने के लिए आखिरी डेडलाइन 31 जुलाई दी गई थी। इस मामले में दिल्ली से बड़ा दिल एनसीआर के फरीदाबाद और गुड़गांव का है। जिसने साढ़े आठ हज़ार कमरों में साढ़े साढ़े सात हज़ार कमरे तैयार कर लिए हैं। नोएडा की बात करें तो यहां भी 80 फीसदी से ज्यादा तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।

यह दिल्ली ही है जिसने तैयारियों की पोल खोली है और इसी की सुस्ती ने कॉमनवेल्थ का बजट भी बढ़ाया है। सरकार खेल गांव की इमारतों को देखकर अपनी पीठ तो थपथपा सकती है, लेकिन इन अधूरी तैयारियों का जवाब भी किसी न किसी को देना होगा। दिल्ली में कॉमनवेल्थ खेलों का बजट 17 गुना ज़्यादा बढ़ चुका है। यह हम नहीं कह रहे, बल्कि खेलमंत्री ने खुद माना है। हालांकि यह सरकारी आंकड़ा है, जबकि हकीकत यह है कि तैयारियों का खर्च इससे भी कई गुना ज़्यादा बढ़ने वाला है। और इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है तैयारियों में देरी।

< कहां ठहरती है हमारी दिल्ली

खेलों के आयोजन में बीजिंग और दुनिया के दूसरे बड़े देशों के सामने कहां ठहरती है हमारी दिल्ली। अगर देश की इज्ज़त बचाने का खर्च आम आदमी की जेब उठा रही है, तो यह सवाल उठना लाज़िमी है कि आम आदमी को इसका क्या फायदा होगा। जानकार इन्हें अब तक के सबसे महंगे कॉमनवेल्थ खेल बता रहे हैं। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देश ने भी खेलों पर इतना खर्च नहीं किया। बीजिंग ने ओलंपिक खेलों के दौरान ज़रूर दुनिया के सामने मिसाल पेश की, लेकिन इसका इस्तेमाल सिर्फ बीजिंग ही नहीं, कई शहरों के मूलभूत ढांचे के विकास के लिए किया गया। कॉमनवेल्थ खेलों के लिए आने वाली तैयारियों के कुल खर्च का अंदाज़ा तकरीबन 1.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर लगाया गया है।

आंकड़ों के मुताबिक, इसमें 17 फीसदी तक का इज़ाफा हो सकता है। यह पैसा कुल सत्रह खेलों के 285 इवेंट्स पर खर्च किया जाएगा, जिनमें 73 देशों के खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। हिंदुस्तान कॉमनवेल्थ खेलों के ज़रिए बीजिंग के नक्श ए कदम पर चलने की कोशिश में है। 2008 में चीन ने इतिहास के सबसे महंगे ओलंपिक्स की मेजबानी कर दुनिया के सामने मिसाल रखी। आंकड़ों के मुताबिक, इन ओलंपिक्स पर 40 बिलियन डॉलर का खर्च किया गया। हालांकि कॉमनवेल्थ खेलों के मुकाबले बीजिंग ओलंपिक्स में 28 खेलों के 302 इवेंट्स का आयोजन किया गया। इसमें हिस्सा लेने वाले देशों की संख्या भी करीब 204 थी। लेकिन इतनी बड़ी रकम चीन ने सिर्फ मेहमानों की आवभगत में नहीं लगाई। कई इवेंट्स को बीजिंग से बाहर आयोजित किया गया। यानी कुल मिलाकर बीजिंग के अलावा चीन के कई दूसरे बड़े शहरों का भला हुआ। लेकिन हमारे यहां खेलों के शुरू होने से पहले ही पर्दे के पीछे चालू है करप्शन का काला खेल।

दिल्ली में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स का बजट अनाप-शनाप बढ़ता जा रहा है। और, यह सोचकर हम चुप नहीं रहे सकते कि इससे हमें क्या। दरअसल, सरकार यह सारा का सारा खर्च हमारी आपकी ही जेब से निकालने की तैयारी में है। दिल्ली सरकार 2010-11 में दिल्ली में रहने वाले लोगों से 15582 करोड़ रुपए टैक्स वसूलने की तैयारी में है, जबकि इससे पहले यानी साल 2009-10 में दिल्ली सरकारी की टैक्स वसूली थी 1300 करोड़ रुपए की। साफ है कि दिल्ली में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स की कीमत दिल्ली के लोगों को दस गुना से भी ज्यादा टैक्स देकर चुकानी पड़ेगी। कॉमनवेल्थ खेल शुरू होने से पहले ही असली विनर करप्शन ही नज़र आ रही है। चीफ विजिलेंस कमीशन की हालिया रिपोर्ट इसे साबित करने के लिए काफी है।

सीवीसी की रिपोर्ट के मुताबिक खेलों के कुल 16 प्रोजेक्ट्स में करीब 2500 करोड़ का घपला किया गया है। इनमें कई स्टेडियम्स की रिपेयर और सड़कों के प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। इस रिपोर्ट को सच मानें, तो खेलों की तैयारियों में लगी करीब सभी एजेसियों ने टेंडर नियमों को ताक पर रखकर ऊंचे दामों पर प्रोजेक्ट्स की बंदरबांट की। लेकिन ज़्यादा कीमत चुकाने के बाद भी न तो काम वक्त पर हुआ और ना ही काम की क्वालिटी संतोषजनक है। खिलाड़ियों और दर्शकों की सुरक्षा को ताक पर रखकर ज़्यादातर प्रोजेक्ट्स के लिए इस्तेमाल कंक्रीट में मिलावट पाई गई है। कामों की प्रगति का जायज़ा लेने के लिए बनाई गई इंस्पेक्शन कमेटी ने कभी अपनी रिपोर्ट पेश की ही नहीं। रिपोर्ट के मुताबिक खेलों के लिए तैयार किए गए 17 वेन्यूज़ में से 14 में इलेक्ट्रिसिटी सुविधाएं मानकों पर खरी नहीं उतरती।

 

 

 

 रेटिंग दें
 Rating: 7.0 out of 2 votes cast


आपकी राय 



नाम:
ई-मेल  


आपकी राय 

देश

 

दुनिया

 

कारोबार

 

खेल

 

मनोरंजन