Tue Aug 31 2010 12:00:18 GMT+0530 (India Standard Time)
गुनाह की राहों को अपना हमसफ़र बनाने वाले कई बार क़ानून की तंग गलियों से हाथ छुड़ाकर भागना भी सीख ही जाते हैं, लेकिन अब उनकी हर हरकतों पर ख़ामोश निगहबानी करने वाला कोई और भी है। वह न सिर्फ़ उनपर नज़र रख रहा है, बल्कि पहुंचा रहा है उन्हे हवालात। गुनाह करने वाले हो जाएं होशियार, क्योंकि उनकी करतूतों का चश्मदीद है- तीसरी आंख...
गुनाहगारों की सबसे बड़ी दुश्मन उस तीसरी आंख से आपको रुबरू कराएं। उससे पहले आपको दे देते हैं एक चेतावनी। अगर आप सोच रहे हैं की बैंक में जमा करवाई गई आप के ख़ून पसीने की कमाई सुरक्षित हैं, तो शायद आप ग़लत हो सकते हैं। आपकी गाढ़ी कमाई पर अब लग चुकी है शातिर लुटेरों की नज़र। अगर आप भी ATM का इस्तेमाल करते हैं, तो यह ख़बर आपके लिए बेहद ज़रुरी है।
किसी बड़े ब्रांड के जूते ख़रीदने हो या कोई शानदार सी डेनिम जींस। मॉल्स में फ़र्नीचर ख़रीदने हों या फिर घर ज़रूरत के राशन की ख़रीदारी। पर्स में रखे डेबिट कार्ड हैं ना। ना पैसे साथ ले जाने की ज़रूरत, न वक़्त बेवक़्त पैसों की ज़रूरत। बस ज़रूरत है पर्स से एटीएम निकालने की। हक़ीक़त तो यही है कि इस भागती दौड़ती ज़िंदगी में एटीएम कार्ड आपकी ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है। किसी न किसी बैंक का एटीएम कार्ड आपकी जेब में भी ज़रूर होगा। अगर हां, तो तुरन्त अपना पिन नम्बर यानी पर्सनल आइडेन्टीफ़िकेशन नम्बर बदल डालिए, क्योंकि कहीं दूर बैठे किसी शातिर की नज़रें आपके ख़ून पसीने की कमाई पर लगी हो सकती है। हो सकता है कि वे वहीं बैठे बेठे आपके एकाउंट का पैसा बड़े आराम से निकाल रहा हो। चौकिंये मत। यह हक़ीक़त है। ऐसा ही वाकया पेश आया है चंडीगढ में, जहां महज़ एक हफ़्ते के दौरान ही दस से ज़्यादा लोग किसी अनजान शातिर का शिकार हो चुके हैं।
चंडीगढ में इस तरह के मामले बीते कई दिनों से आ रहे हैं और अब तो आलम यह है कि एस बी आई बैंक का एटीएम कार्ड रखने वालों के होश उड़े हुए हैं। लोग बैंकों में अपने कार्ड सरेन्डर करने के लिए दौड़ने लगे हैं, तो कुछ दिन में कई-कई बार अपना एकाउंट चेक कर रहे हैं, इस डर से कि कहीं अगला शिकार वह तो नहीं।
हर कोई हैरान है, परेशान है। कोई नहीं जानता कि वह शातिर कौन है, जो लोगों के पैसे इतनी आराम से गायब कर ले रहा है। न बैंक के अधिकारी, न पुलिस। लेकिन पी-7 न्यूज़ की तफ़्तीश रंग ले आई है। अब से बस थोड़ी ही देर में बताएंगे उस शातिर का चेहरा, जो गायब कर रहा है लोगों का पैसा। जिसकी नज़र है आपकी कमाई पर।
हमारी तफ़्तीश में हमारा साथ दे रही थी, तीसरी आंख। उस तीसरी आंख ने जो कुछ देखा था, उसे देख कर आप भी शायद हिल ही जांए। सोच में पड़ जांए कि आपके ख़ून पसीने से कमाई गई आपकी रकम कितनी सुरक्षित है। कौन लगा रहा है उन पैसों में सेंध?
चंडीगढ में हर रोज़ लोगों के अकाउंट से पैसे गायब हो रहे हैं। पैसे उड़ाने में माहिर शातिर चोर कार्ड की क्लोनिंग करके लोगों के अकाउंट से पैसे उड़ा रहे हैं, ऐसे में क्लोज सर्किट कैमरे में क़ैद हुई तस्वीरें बेहद अहम हैं और स्टेट बैंक के अधिकारी अब इन तस्वीरों को पुलिस को सौंप भी चुके हैं।इस शातिर लुटेरे ने अब तक कितने अकाउंट्स से पैसे उड़ाए हैं। कोई नहीं जानता, लेकिन इसकी इस करतूत ने बैंक अधिकारियों को बेबस कर दिया है।
सैकड़ों संगीनों और सुरक्षाकर्मियों की चौकस निगाहों के बावजूद, कुछ शातिरों ने कर डाली एक अनोखी वारदात। एक ऐसी वारदात, जिसे अब से पहले सिर्फ़ फ़िल्मी कहानियों में देखा गया था। लेकिन हक़ीक़त पेश आई मुंबई पुलिस के सामने। उनसे मुंह चिढा रही थी वह वारदात। कह रही थी ऐसा हो चुका है।
रौशनी की चमक से नहाती एक महफ़िल बेशक़ीमती हीरों की दमक से चौँधियाती आखें, बेहद चुस्त सिक्योरिटी, हर एक फ़ीट के फ़ासले पर चौंकन्ने हथियारबन्द सिक्योरिटी गार्ड्स। लेकिन इन सैकड़ों नज़रों के ऐन सामने से चोरी हो जाते हैं करोड़ों के हीरे। शायद ऐसे सीन आपने किसी फ़िल्म में ही देखे होंगे, लेकिन जब ऐसा ही फ़िल्मी अफ़साना हक़ीक़त की ज़मीन पर। वारदात बन कर पेश हो जाए तो। शायद आपके मुंह से भी बेसाख़्ता यही निकलेगा कि क्या ऐसा हो सकता है? लेकिन यक़ीन जानिए ऐसी ही एक हैरान करने वाली वारदात पेश आई मुंबई में। जगह थी गोरेगांव स्थित इज़राइली ग्रुप दालुमी की लगाई हीरों की एक प्रदर्शनी। करोड़ों- अरबों के हीरों की चमक से सराबोर उसी प्रदर्शनी के बीचो बीच सैकड़ों सुरक्षाकर्मियों की नाक के ठीक नीचे से गायब हो गए छह करोड़, साठ लाख रुपए के हीरे। संगीनों की सुरक्षा बेकार चली गई। दरवाज़ों पर तलाशी कुछ रंग ना लाई। हाईटेक अलार्म मशीन धरी रह गई, लेकिन काम आ गई एक आंख। वह आंख सब कुछ बड़ी ख़ामोशी से देख रही थी। पकड़ रही थी उन चोरों की हर हरकत। पहचान रही थी उस वारदात का हर राज़। क्योकिं वह थी उस प्रदर्शनी की तीसरी आंख।
एक बार फिर क़ानून के हाथों से बहुत दूर थे गुनाहगार। न कोई सबूत था, न कोई गवाह। फ़िल्मी स्टाइल से हुई इस करोड़ों की चोरी के बाद भी पुलिस के हाथ हमेशा की तरह खाली थे। एक बाऱ फिर मददगार बनी तीसरी आंख। और उसने खोल ही दिया इस अनोखी वारदात का राज़।
तीसरी आंख ने सब कुछ देखा था। सैकड़ों सिक्योरिटी गार्ड्स और संगीनों के साए के बीच गायब हुए उन करोड़ों के हीरा चोरों को पहचान लिया था उसने। लिहाज़ा पुलिस की तफ़्तीश में तीसरी आंख ने राज़ का पर्दाफ़ाश कर ही दिया। तस्वीरों में साफ़ दर्ज़ थी, उन चार विदेशी हीरा चोरों की करतूत कि कैसे तीन चोरों के साथ आई एक चोरनी ने बेशक़ीमती हीरों के पचहत्तर पैकेटों को। सिक्योरिटी की नज़रों से छिपा अपने बैग में ऱख लिया था। तस्वीरें साफ़ दिखा रही थी उन चोरों की सूरत की बारीकियां। बस फिर क्या था, पुलिस के पास आ चुकी थी उनकी पहचान और पुलिस जुट गई उनको गिरफ़्तार करने की कोशिशों में।
पुलिस ने अपना जाल बिछा दिया था, लेकिन यह चारों शातिर मुंबई की धरती छोड़ पकड़ चुके थे दुबई की फ़्लाइट। एक बार फिर पुलिस गच्चा खा चुकी थी, लेकिन वक़्त रहते पुलिस ने दुबई पुलिस से सम्पर्क किया। इन्टरपोल को भी इसकी जानकारी दी गई और आख़िरकार दुबई एअरपोर्ट पर पुलिस की गिरफ़्त में आ ही गए ये शातिर।
करोड़ों के हीरों की चोरी करने के बाद भी साफ़ बच निकलने वाले शातिर चोर। आख़िरकार पहुंच ही गए अपनी असल मंजिल, यानी हवालात। पुलिस भले ही अपनी पीठ थपथपा रही हो, लेकिन तीसरी आंख ने एक बार फिर एक पुरानी कहावत को सच साबित कर डाला कि गुनाहगार कितना भी शातिर क्यों ना हो, क़ानून के हाथों से दूर नहीं जा सकता।
गुजरात के सूरत में एक रात की कालिख जब छंटी, तो सुबह के उजाले के साथ दिखे एक जुर्म के निशान। वह निशान मांग रहे थे, सूरत पुलिस से हिसाब और पुलिस हमेशा की तरह मुंह बाएं देख रही थी तमाशा। वह गुनाहगार भी कभी पुलिस की पकड़ में ना आते अगर ना होती तीसरी आंख।
रात के घुप्प अंधेरे में जब हर ओर फैली ख़ामोशी को कोई अन्जान सरसराहट तोड़ती है, तो यक़ीनन कहीं कोई किसी साज़िश में मुब्तिला होने का अहसास दिला देता है। ऐसे ही अंधेरे में एक साज़िश को अंजाम की सूरत तक पहुंचाते यह दोनों गुनाहगार नहीं जानते थे कि पास ही कोई उन पर अपनी नज़रें गड़ा कर बैठा है। वह उनकी हर हरकत पर निगाह रखे हुआ है। यह तस्वीरें है सूरत की जहां आधी रात के बाद ये दोनों शातिर चोर बिना किसी डर के लगे हुए हैं एक मेडिकल स्टोर का ताला तोड़ने में..। देखिए, किस तरह ये दोनों एक सरिए की मदद से ताला तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। पहले तो एक चोर की ताला तोड़ने की कोशिश बेकार हुई, लेकिन जल्द ही उसका दूसरा साथी ताला तोड़ने के लिए एक ख़ास औजार लेकर उसके पास जा पहुंचा। फिर क्या था, चंद कोशिशों के बाद ताला टूट गया और थोड़ी ही देर में दोनों मौक़े से अपना काम कर चलते बने। इस बात से बेख़बर कि उनके इस गुनाह का एक चश्मदीद सब कुछ देख रहा था।
तीसरी आंख तो अपना काम कर गई थी। अब बस ज़रूरत थी इसे उस इंसानी आंख की जो इन बदमाशो को पहचान कर सलाखों के पीछे पंहुचा दे। पुलिस की शिनाख़्त के दौरान जब इन तस्वीरों को पास के एक चौकीदार को दिखाया गया, तब उसने इन दोनों को पहचानने में ज़रा भी चूक नहीं की और दोनों चोरो को पकड़ा गया। तीसरी आंख की खामोश गवाही ने उसे पहुंचा ही दिया हवालात।
बहरहाल तीसरी आंख की इस कारनामे की बदौलत सूरत के इस दुकानदार को वह हासिल हुआ, जिसे वापस पाने की उम्मीद वो खो बैठा था।