Sat Jul 24 2010 22:19:39 GMT+0530 (India Standard Time)
अंडरव्लर्ड के शार्प शूटर, वे शूटर्स जिनकी बदौलत दो दशक से भी ज्यादा वक्त से अंडरव्लर्ड सरगनाओं की दहशत से मायानगरी मुंबई खौफज़दा है, लेकिन हकीकत तो यह है कि अब मायानगरी मुंबई में अंडरव्लर्ड सरगनाओं ने श़ॉर्प शूटर्स का इस्तेमाल करना बंद कर दिया है। अंडरव्लर्ड ने तैयार की है अनाड़ी शूटर्स की फौज।
अंडरव्लर्ड की आपसी रंजिश की कहानी पुरानी है, लेकिन एक बार फिर आपसी कलह खुलकर सामने आ रही है। आज हम आपको अंडरव्लर्ड के मौजूदा हालात और हर उस साजिश से वाखबर करेंगे, लेकिन सबसे पहले उसी की कड़ी में अंजाम दी गई उस वारदात की चर्चा जिसने हर किसी को सोचने पर कर दिया है मजबूर। अंडरवर्ल्ड सरगनाओं की बौखलाहट खुलकर सामने आ रही है। आलम यह है कि कभी बफादार साथी रहे वे लोग भी एक दूसरे के जान के दुश्मन बन गए हैं, जो कभी एक दूसरे के लिए जान देने को तैयार रहते थे।
शनिवार को मुंबई के आर्थर रोड जेल में अबू सलेम पर हुआ हमला इसी हकीकत को साबित कर रहा है। अबू सलेम, जो कभी डी कंपनी के सरगना दाउद इब्राहिम कास्कर का खास माना जाता था। दाउद के उसी वफादार पर हमले ने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
सलेम पर हमला किसी और ने नहीं, बल्कि दाउद इब्राहिम कास्कर और टाइगर मेमन का खास माना जाने वाले मुस्तफा दौसा ने किया है। दौसा 1993 के मायानगरी मुंबई में हुए हमले का आरोपी है। कहा यह जाता है कि दौसा 1990 के दशक में अंडरव्लर्ड सरगना दाउद इब्राहिम का खास था। जेल अधिकारियों की मानें, तो दौसा ने उस वक्त अबू सलेम पर हमला किया जब वह आर्थर रोड जेल के बैरक नंबर 6 के बाहर टहल रहा था। हालांकि हमले में सलेम सिर्फ घायल हुआ है। हमले की वजह का अब तक खुलासा नहीं हो पाया है, लेकिन कहा जा रहा है कि यह पुरानी रंजिश का नतीजा है। लेकिन इस वारदात ने हिन्दुस्तान की सबसे संवेनशील माने जाने वाले आर्थर रोड जेल की सुरक्षा के साथ-साथ अंडरव्लर्ड सरगनाओं की अपसी कलह की हकीकत एक बार फिर सबके सामने ला दी है।
दो दशक से ज्यादा का वक्त गुजर चुका है, लेकिन मायानगरी मुंबई में अंडरव्लर्ड सरगनाओं की बादशाहत कम नहीं हुई। वो सरगना खुद तो विदेशों में बैठे हैं लेकिन मायानगरी में उनके गुर्गे खुलेआम खेल रहे हैं मौत का खेल, लेकिन अब सरगनाओं ने अपने मोहरे बदल दिए हैं । शार्प शूटर की जगह उनके गैंग में अनाड़ी शूटर शामिल हो गए हैं। कौन हैं अंडरव्लर्ड के नये मोहरे...आइए देखते हैं....
मायानगरी मुंबई, रंगीन शाम में मदमस्त यहां के वाशिंदे, हर रंजो गम से दूर अपनी दुनिया में खोये हुए यहां के लोग। वक्त के हर लम्हों का जिंदादिली के साथ इस्तकबाल करने वाले वे लोग, जिन्हें नहीं मतलब है किसी नफरत से और न ही सरोकार है किसी दूसरे की जिंदगी से। यहां के लोगों ने तो हर वक्त को जीया है। हर लम्हों को जीने की चाहत है, लेकिन कोई है जो छीन लेना चाहता है यहां के वाशिंदों की खुशी। यहां के लोगों का सकून। कोई है जिसकी नजर है यहां के लोगों की खुशियों पर। मुंबई के वाशिंदों की दौलत पर। रूपहले पर्दे के मशहूर डायरेक्टर से लेकर हर बड़ा कारोबारी है उसके निशाने पर। सच तो यह है कि हर किसी का कारोबार चलता है उसी के रहमोकरम पर। उसका मकसद है लोगों के जेहन में दहशत भर देना।
दहशत का वह नाम है अंडरव्लर्ड। अंडरव्लर्ड के सरगना जो सरहद पार बैठ कर भी बेखौफ चलाते हैं अपनी दहशत की दुकान। इनके एक फोन क़ॉल पर होती है दौलत की बरसात। कोई ऐसा नहीं है जो इनके हुक्म की मुखालफत करने की हिम्मत जुटा पाये, लेकिन सच तो यह है कि इनकी दहशत की दुकान चलाने वाला इनकी बादशाहत को बरकरार रखने वाला शातिर खिलाड़ी सरहद पार नहीं बैठा है, बल्कि वह है आपके बीच। हम जिनकी बात कर रहे हैं वह कोई और नहीं, बल्कि अंडरव्लर्ड के वे शॉर्प शूटर्स हैं जिनकी बदौलत अंडरव्लर्ड का वजूद है।
अब मुंबई के लोगों के लिए खुशखबरी है। वे बेखौफ होकर ले सकेंगे हर रंगीन शाम का लुत्फ, क्योंकि ड़ॉन के पास अब नहीं है कोई शॉर्प शूटर। नहीं है कोई ऐसा जो डॉन के नाम पर आपको डरा सके, क्योंकि डॉन अब खुद डर गया है। वह किसी तरह दोबारा अपनी बादशाहत कायम करना चाहता है, लेकिन सच तो यह शॉर्प शूटर्स की फौज तैयार किए बिना मुमकिन नहीं है।
दशकों से अपने शॉर्प शूटर्स की बदौलत दहशत की दुकान चलाने वाला ड़ॉन क्या वाकई हार चुका है। हम आपको बताते हैं उन लोगों के बारे में जिनकी बदौलत अब तक अंडरव्लर्ड का वजूद है या यूं कहें कि इन्हीं की बदौलत अंडरव्लर्ड सरगना मायानगरी मुंबई को अपनी जागीर समझ कर बैठे हैं। कौन हैं ये लोग...ज़रा आप भी देखिए...
माया डोलस- डी कंपनी का शॉर्प शूटर। यह वह नाम था जिसके खौफ से न सिर्फ मुंबई के बड़े कारोबारी, बल्कि पुलिस भी दहशत में थी। सच तो यह है माया डोलस डी कंपनी का वह नाम था, जिसके खौफ की वजह से ही मायानगरी मुंबई में डी कंपनी का वजूद था, लेकिन माया की मौत हो चुकी है।
फिरोज कोंकणी- माया डोलस के बाद फिरोज कोंकणी डी कंपनी का सबसे बडा शॉर्प शूटर था। फिरोज कोंकणी ही वह शख्स था जिसके नाम से छोटा राजन भी खौफ खाता था।
बाबा रेड्डी- राजन का सबसे भरोसेमंद शॉर्प शूटर। सालों तक मुंबई की जनता के लिए दहशत का दूसरा नाम बन चुका बाबा रेड्डी भी पुलिस की गोलियों का शिकार हो गया।
बालू किरण ढोकरे- यह वह नाम था जिसकी वजह से न सिर्फ मुंबई में, बल्कि नेपाल में भी छोटा राजन की बादशाहत थी। कहा तो यह भी जाता है कि बालू ढोकरे ने ही दाउद के सबसे खास दिलशाद मिर्जा बेग की हत्या कर नेपाल में डी कंपनी को बड़ा झटका दिया था, लेकिन आतंक के इस अध्याय का भी खात्मा हो चुका है।
कुंदन सिंह राउत- राजन का सबसे खास शॉर्प शूटर। वह जिंदा है य़ा फिर उसकी भी हो चुकी है मौत इस पर सवाल बरकरार है।
रवि पुजारी- छोटा राजन के गिरोह का सबसे खास शार्प शूटर।
प्रकाश पांडे- छोटा राजन के गिरोह की कमान इसी शख्स के हाथ में है। उत्तराखंड के हलद्वानी का रहने वाला यह वह शार्प शूटर है जिसके खौफ की वजह से मायानगी मुंबई में राजन की दुकान चल रही है।
भरत नेपाली- पहले यह राजन के गैंग में काम करता था, लेकिन कहा जा रहा है कि इन दिनों उसने अपना अलग गैंग तैयार कर लिया है और हाल ही में राजन के सबसे खास शॉर्प शूटर फरीद तनाशा की हत्या की है।
सतीश कालिया- छोटा राजन गैंग का श़ॉर्प शूटर, फिलहाल मुंबई के आर्थर रोड जेल में बंद है।
इकबाल चिंदी- इकबाल चिंदी डी कंपनी का शॉर्प शूटर माना जाता था, लेकिन दाउद से अलग होकर मुंबई पुलिस का खबरी बनना इसे मंहगा पड़ा और अपनी जान गंवानी पड़ी।
सतीश कालिया- छोटा राजन का तेज तर्रार शार्प शूटर। फिलहाल सतीश कालिया जेल की सलाखों में कैद है।
यूसुफ बचकाना- दिखने में मासूम, लेकिन हकीकत उतनी ही खतरनाक। यह वह शख्स है जिसने कई सालों तक मुंबई पुलिस की नींद उड़ा दी थी। छोटा राजन गिरोह में काम करने वाला यूसुफ बचकाना फिलहाल जेल में है।
डी के राव- छोटा राजन का वफादार। आरोप है कि कई सालों तक यह राजन के लिए काम करता रहा और उसी आरोप में गिरफ्तार भी हुआ। फिलहाल डी के राव जमानत पर बाहर है।
यानी कि जिनकी बदौलत अंडरव्लर्ड का वजूद था। एक एक कर वह सारे बिखर चुके हैं। यही वजह है कि अब धीरे धीरे मायानगरी मुंबई के उपर से खौफ का बादल खत्म हो रहा है।