Fri Sep 03 2010 21:52:25 GMT+0530 (India Standard Time)
सालों से हिन्दुस्तान आंतकियों के नापाक मंसूबों का निशाना बनता आया है। ना जाने कितने मासूमों की जिन्दगी में अब तक नफरत की स्याही से खौफ और दर्द की इबारत लिखी जा चुकी है। लेकिन आज हमारे सामने फिर से मंडरा रहा है एक साजिश का खतरा। ऐसी साजिश जो रची जा रही है हिन्दुस्तान की ही सरजमीं पर।
आंतकवाद वह शब्द है जो ना किसी सीमा से रुकता है और ना कोई मुल्क या शख्स उसकी जद में आने से बच सकता है। ना उसे किसी ताकत से दबाया ही जा सका है। बीते कई बरसों में दहशत की साजिशों से कई बार हिन्दुस्तान का भी सामना हो चुका है और एक बार फिर मंडरा रहे हैं खतरे के बादल। डरा रहा है एक साजिश का अंदेशा। आतंकवाद, जी हां इस एक शब्द में छिपी है वह नफरत जिसका दंश मुल्क कई बार झेल चुका है। दहशतगर्द हर बार अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने में कामयाब हो रहे हैं। कभी मुंबई, तो कभी दिल्ली, कभी जयपुर तो कभी अहमदाबाद।
बेशक इलाके बदल जाते हैं लेकिन हर बार दहशतगर्द हमारे मुल्क में मौत बरसाने में कामयाब हो रहे हैं। कभी जमीन, कभी पानी के रास्ते तो कभी आसमानों से कहर बन कर उतरता रहा है मौत का साया। हैरान कर देने वाली हकीकत तो यह है कि एक बार फिर हिन्दुस्तान को दहलाने की तैयारी की जा रही है। सरहद पार बैठे आतंक के आका हमारे मुल्क को तबाह करने की साजिश रच रहे हैं। यह हम यूं ही नहीं कह रहे बल्कि देश के गृह मंत्री ने भी खुफिया जानकारी के हवाले से इस बात की तस्दीक की है कि देश आतंकियों के निशाने पर है। लेकिन सवाल उठता है कि तमाम सुरक्षा बंदोबस्त के बाद भी वह दहशतगर्द अपने मंसूबों को अंजाम देने में आखिर कैसे हो रहे हैं कामयाब ? शायद इसके लिए जिम्मेदार हमारे मुल्क का वो गद्दार है जो चंद दौलत की खातिर बेच चुके हैं अपना जमीर, अपना ईमान।
कभी दौलत की तराजू तौल कर तो कभी धर्मों ईमान का वास्ता देकर आतंक की फसल हिन्दुस्तान की सरजमीं पर तैयार की जा रही है। ऐसा हम इसलिए भी कह रहे हैं क्योंकि हर हमलों के बाद जो आतंकवादी पुलिस की गिरफ्त में आते हैं उनमें से ज्यादातर दहशतगर्दों का ताल्लुक हमारे मुल्क से होता है। मतलब साफ है, आतंक का बीज खुद हमारे मुल्क की माटी में बोया जा चुका है। जिसकी फसल तबाही की शक्ल में वक्त दर वक्त हमारे सामने होती है। लेकिन सवाल यह भी है कि आखिर तबाही का सामान उन हाथों तक कैसे पहुंच जाता है ना सिर्फ आंतकवादी, बल्कि खौफनाक नक्सलियों के हाथों में भी पहुंच जाता है दहशत का वह साजो सामान। जिसका मकसद होता है सिर्फ और सिर्फ बेकसूरों की मौत। आखिर कहां से आता है उनके हाथों में आतंक का वह सामान ?
पी-7 न्यूज आज करने जा रहा है अब तक के सबसे सनसनीखेज सच का खुलासा। जी हां, आज हम करेंगे बेनकाब मुल्क के उन गद्दारों को जो कर रहे मौत का सौदा। वह भी देश के दुश्मनों के हाथों आज होगा दहशत की दुकान का हर राज। आंतक की असल फैक्ट्री का हर एक सच। दहशत की उस दुकान से पर्दा उठाने से पहले आइये हम बताते हैं कि उस दुकान के माल ने अब तक कितना कहर बरपाया है। कैसे उस दुकान के खरीदारों ने हमें वह जख्म दिए जिसकी टीस आज भी रह रह कर दर्द दे रही है और यह भी कि उस दुकान के दुकानदारों ने एक बार फिर कर लिया है उस टीस को कई गुना बढ़ा देने के लिए माल तैयार। वक्त शाम के करीब सात बजे। गुलाबी नगरी जयपुर देशी और विदेशी सैलानियों से शहर गुलजार था। वक्त अपनी रफ्तार से चल रहा था। लेकिन अचानक सब कुछ ठहर सा गया।
वक्त का पहिया थम गया। खुशियां मातम में तब्दील हो गई। हर तरफ चीख- पुकार, मौत का मंजर। किसी की मां तो किसी की बहन दो पल में उससे जुदा हो गई। तबाही का मंजर सिर्फ एक इलाके में नहीं था, बल्कि पूरा शहर मातम में तब्दील हो चुका था। एक के बाद एक सात इलाकों में धमाके के बाद समझते देर नहीं लगी कि आखिर यह किसकी हरकत है। जी हां, दहशतगर्दों ने न सिर्फ अपने नापाक मंसूबों को अंजाम दिया था, बल्कि आतंकवादी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन ने इसकी जिम्मेदारी लेकर अपने इरादे भी साफ कर दिये। हैरान कर देने वाली बात तो यह थी कि मीडिया को भेजे गए मेल में तथाकथित इंडियन मुजाहिद्दीन ने एक वीडियो क्लिप भी भेजा था। जिसमें साइकल पर लटके एक थैले को साफ देखा जा सकता था। जिसमें था तबाही का वही बारूद जिसने गुलाबी शहर की खुशियां छीनी थी। कहां से आए थे तबाही के बारूद।
तमाम सुरक्षा एजेंसियां इस सवाल का जवाब तलाशने में लगी थी। कुछ खुलासे हुए, कुछ होने बाकी थे। लेकिन सच तो यह भी कि जख्म भरने से पहले ही रची जा रही थी एक और तबाही की साजिश और इस बार दहशतगर्दों के निशाने पर था अहमदाबाद। यही वह मनहूस दिन था जब दहशतगर्दों ने एक के बाद एक 17 धमाके कर पूरे शहर को तबाह कर दिया। 55 बेगुनाहों की मौत और करीब 200 से ज्यादा लोगों के जख्मी होने के हर जगह चीख पुकार का मंजर था। शहर बारूद की ढेर पर था। जांच शुरू हुई, कुछ सुबूत हाथ लगे।
कड़ियां जुड़ती गई और कहा गया कि इस तबाही के लिए भी दहशतगर्दों की वही जमात जिम्मेदार है जिसने जयपुर में मौत बरसाया था। साथ ही सामने आया एक ऐसा सच जिसने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी। और वह सच यह कि दोनों धमाकों में जिस विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था वह बारूद कहीं और से नहीं बल्कि हिन्दुस्तान की एक फैक्ट्री के थे। जी हां, मौत के सौदागर अपने ही मुल्क के वह गद्दार थे जिन्होंने न जाने कितने ही बेगुनाहों को दे दी थी मौत। आखिर कहां थी वह दुकान, जहां से निकल रहे थे मौत के साजो सामान। कौन थे उस दुकान के दुकानदार, जो खरीदारों को बेच रहे थे दहशत के सामान। यह हकीकत तो सामने आ गई, लेकिन इसके साथ ही सामने आई थी एक और खतरनाक साजिश।
राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमा से लगा धौलपुर शहर और शहर के बाहरी हिस्से में बना बारूद फैक्ट्री आरईसीएल। जी हां, राजस्थान एक्सप्लोसिव एंड कैमिकल लिमिटेड कहने को तो यहां बनाये जाने वाले बारूद का इस्तेमाल पहाड़ों को तोड़ने में किया जाता है। लेकिन अगर हम आपसे कहें कि जयपुर और अहमदाबाद में हुए सीरियल बम धमाकों में इस्तेमाल हुआ बारूद इसी फैक्ट्री में तैयार किया गया था तो हैरान होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि यह हकीकत है जिसकी तस्दीक सुरक्षा एजेंसियों ने भी कर दी है। जी हां, अहमदाबाद और जयपुर में भेजा गया मौत का सामान इसी फैक्ट्री में तैयार किया गया था। ऐसे में सवाल यह कि आखिर दहशतगर्दों के हाथों मौत के सामान की इतनी बड़ी खेप पहुंची कैसे ? जवाब कागजों में कलमबंद तो किया जा चुका है लेकिन वह राज जनता के सामने अब तक नहीं आ पाया है। लेकिन अब जो हकीकत हम आपको बताने जा रहे हैं यकीन मानिए उसे सुनकर आपके होश फाख्ता हो जायेंगे।
एक बार फिर मौत का सामान दहशतगर्दों के हाथों बेचे जाने की तैयारी की जा चुकी है। ऐसा हम इसलिए भी कह रहे हैं कि बारूद से लदे 61 ट्रक राजस्थान के धौलपुर से निकले तो जरूर लेकिन सही ठिकाने पर पहुंचने से पहले ही कहीं गायब हो गए। दर हकीकत राजस्थान एक्सप्लोसिव एंड कैमिकल लिमिटेड की इसी फैक्ट्री से निकले हजारों टन बारूद से लदे ट्रक सड़क पर चलते- चलते अचानक गायब हो चुके हैं। इन ट्रकों में 848 मीट्रिक टन बारूद और लाखों की संख्या में डेटोनेटर लदे हुए थे।
लेकिन बीते दो महीनों में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की लाख कोशिशों के बाद भी नतीजा सिफर ही है। हां कुछ ट्रकों को ढूंढ निकालने में सुरक्षा एजेंसियों को कामयाबी जरूर मिली है लेकिन वह भी खाली। खुद हमारी और आपकी सुरक्षा का दंभ भरने वाले अधिकारी भी उस खौफनाक हकीकत से बाखबर होने के बावजूद कुछ कर पाने में मजबूर है। जाहिर है कि साजिश बेहद खतरनाक थी। हर किसी के होश उड़ा देने के लिए काफी थी। लेकिन इससे पहले की इस साजिश से निपटा भी जाता एक और बड़ा खतरा मुंह बाए खड़ा हो गया। क्या था वो खतरा और क्या थी इसके पीछे की साजिश ?
बारूद से लदे इकसठ ट्रक जो कहीं भी तबाही फैलाने के लिए काफी थे। धौलपुर से बारूद सागर के संदेरी इलाके की गणेश विस्फोट नाम की कंपनी तक जाने के लिए निकले। लेकिन अचानक एक खबर के बाद पुरे महकमे में हड़कंप मच गया। जी हां, वह खबर थी बारूद से लदे इन ट्रकों के गायब हो जाने की। आनन- फानन में पुलिस टीमें अलग- अलग इलाकों में तफ्तीश के लिए कूच कर गईं। लेकिन अभी पुलिस की परेशानी और बढने वाली थी। सागर से लौटी पुलिस टीम एक और बेहद बुरी खबर लेकर आई। चदरी अशोक नगर इलाके की एक कंपनी को भेजे गए एक सौ तीन बारूद से लदे ट्रक भी। यूं ही सड़क पर चलते- चलते गायब हो गए थे। हर कोई हैरान था, परेशान था। आशंका जताई जा रही थी कि कहीं बारूद की इतनी बड़ी खेप देश के दुश्मनों के हाथों में तो नहीं पड़ गई।
पहले इकसठ और फिर एक सौ तीन। यानी बारूद और डेटोनेटर से भरे कुल एक सौ चौंसठ ट्रक। गायब हो चुके थे। लेकिन दो महीने की जांच के बाद भी पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के हाथ खाली थे। हां, तफ्तीश के दौरान पुलिस ने कुछ ट्रकों को तलाश तो लिया लेकिन उनमें लदा बारूद गायब हो चुका है। इस हैरान कर देने वाली इस पूरी कहानी की हैरान करने वाले राज खुले कुछ गिरफ्तारियों से। गणेश विस्फोट कंपनी के मालिक वासवानी समेत तीन लोगों को पुलिस ने इस मामले में तो गिरफ्तार कर लिया। कुछ खाली ट्रकों को बरामद भी कर लिया गया, लेकिन बारूद की इतनी बड़ी खेप के गायब हो जाने की असल कहानी खुली। बारूद किंग शिवचरण हेड़ा और उसकी बीवी दीपा हेड़ा की गिरफ्तारी के बाद।
जी हां, ये ही थे दोनों शातिर जिन्होंने बारूद से लदे एक सौ चौंसठ ट्रकों को सुरक्षा एंजेसियों की लाख कोशिशों के बाद भी डकार लिया था। पुलिसिय़ा पूछताछ में उन्होंने खुलासा कर दिया कि अवैध तरीके से बारूद की इतनी बड़ी खेप उन्होंने किसे सौंपी है। गिरफ्तारी के बाद पुलिसिया पूछताछ में बारूद किंग और उसके साथी टूट गए। उन्होंने अपना मुंह खोला तो कई राज भी सामने आए। लेकिन उन खुलासों को सुनकर खुद पुलिस वालों के भी होश फाख्ता हो गए। जयकिशन आसवानी, शिवचरण हेड़ा और उसकी बारूद के सौदे की मास्टमाइंड दीपा हेड़ा के गिरेवां पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं। पुलिस की मानें तो पूछताछ में इन लोगों ने बेहद अहम खुलासे किए हैं। उसने पुलिस की पूछताछ में बारूद और डेटोनेटर्स से लदे ट्रकों के बारे में अहम जानकारियां दी हैं।
पहला खुलासा
आसवानी शिवचरण हेड़ा का साढू है और इन दोनों ने करीब आठ हजार टन बारूद ना सिर्फ अवैध तरीके से धौलपुर की फैक्ट्री से खरीदे बल्कि उन्हें बेच भी डाला।
दूसरा खुलासा
जिस गणेश ट्रैडर्स के नाम पर एक सौ चौंसठ ट्रक बारूद मंगावाया गया था, उस कम्पनी का लाइसेंस पहले ही एक्सपायर्ड हो चुका है।
तीसरा खुलासा
तेरह अगस्त को हेड़ा दम्पति के फरार होने में एक सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल किया गया था। हेड़ा दम्पति की एक पुलिस अधिकारी और कुछ पुलिस वालों ने मदद भी की थी।
चौथा खुलासा
हेड़ा दंपती ने मध्य प्रदेश से आये बारूद गुजरात के राजकोट, हरियाणा के भिवानी, राजस्थान के चित्तौड़गढ़, टोंक, अजमेर, राजसमंद व उदयपुर में सप्लाई कर दिया। लेकिन बारूद खरीदने वाले खरीदार कौन थे, पुलिस अभी इसका पता नहीं कर पाई है।
भले ही बारूद किंग समेत इस पूरे गोरखधन्धे के कई आरोपियों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन अब तक उस आठ हजार टन बारूद का कोई पता नहीं चल पाया है जिसे हिन्दुस्तान के कई हिस्सों में बेचा जा चुका है और ना अब तक उस बारूद के खरीदारों के असल चेहरे ही सामने आ पाए हैं। आखिरकार राजस्थान के गृह मंत्री ने भी मीडिया के सामने बयान दिये लेकिन इसका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है कि हजारों टन बारूद आखिर कहां गए ? क्या बाकई इसके पीछे एक बड़ी साजिश है और अगर हां तो आने वाले दिन हमारे मुल्क को इन सौदागरों की करतूतों का अंजाम भुगतने को तैयार रहना पड़ेगा !