Wed Sep 08 2010 21:35:45 GMT+0530 (India Standard Time)
पुणे के दो मुजरिम शिकंजे में हैं। ये वही दो मुजरिम हैं जिन्होंने पूरी साज़िश में अहम किरदार निभाया। दोनों के ताल्लुकात लश्करे-ए-तैयबा से है और दोनों ने पाकिस्तान में आतंक की ट्रेनिंग भी ली। ये वह आतंकी हैं जिन्होंने पुणे को ज़ख़्मी किया। जिन्होंने कई लोगों की ज़िंदगियां ले ली, कई को ऐसा दर्द दिया जो जिंदगी भर के लिए एक सदमा बन गया। लेकिन पुणे इससे टूटनेवाला नहीं था। पूणे वह शहर है जो दिन- रात जागता है और जहां दुनिया भर से लोग आते हैं।
महाराष्ट्र एटीएस ने पुणे ब्लास्ट के दो आरोपियों को गिरफ़्तार किया है। ये दोनों लश्कर से जुड़े हुए हैं। और आगे भी ये कई जगहों को निशाना बनानेवाले थे। एटीएस ने इनके पास से दो किलो आरडीएक्स बरामद किया है। साथ में लश्कर से जुड़े कुछ दस्तावेज़ भी मिले हैं। जिनकी छानबीन चल रही है। इस मामले में अभी दो मुख्य आरोपी हैं जो पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। करीब 7 महीने होने को हैं और पुणे धमाके का असल आरोपी अभी तक पकड़ से बाहर है। मंगलवार को महाराष्ट्र एंटी टेररिस्ट सेल ने दो आरोपियों को गिरफ़्तार किया है। इनमें से एक को पुणे के कैंट इलाके से महात्मा गांधी बस स्टेशन से गिरफ़्तार किया गया, जबकि दूसरे को नासिक के अशोक नगर से गिरफ़्तार किया गया।
गिरफ़्तार आरोपियों में से एक का नाम हिमायत बेग बताया जा रहा है, जो लातूर के उदगीर में इंटरनेट कैफे चलाता है और पुलिस के मुताबिक उसी के साथ मिलकर पूरी साज़िश को रचा गया और अंजाम तक पहुंचाया गया। दूसरा आरोपी है शेख लाल बाबा उर्फ बिलाल जिस पर आरोप है कि उसी ने विस्फोटक मुहैया कराया और मंगलवार को जब वह पकड़ा गया तो उसके पास करीब 2 किलो आरडीएक्स था और महाराष्ट्र के कई शहर निशाने पर थे। एटीएस ने कुछ तस्वीरें भी बरामद की है। मौजूदा वक़्त में हिमायत बेग लश्कर का महाराष्ट्र चीफ़ था और उसने पाकिस्तन जाकर लश्कर से ट्रेनिंग ली थी। शेख लाल बाबा उर्फ बिलाल भी दो सालों तक पाकिस्तान में रहा और लश्कर से विस्फोटकों की ट्रेनिंग ली।
बिलाल ने नासिक के कई सरकारी दफ़्तरों की रेकी की और वहां विस्फोट की तैयारी में लगे हुए थे। शुरुआती पूछताछ में दो मुख्य आरोपियों के नाम सामने आए हैं। एक का नाम है मोहसिन चौधरी और दूसरे का नाम है मोहम्मद अहमद ज़रार सिद्दी बाबा उर्फ यासिर उर्फ शाहरुख। फिलहाल दोनों को 20 सितम्बर तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अभी और राज़ उगलवाने में लगी है। पुणे में धमाके की साज़िश काफी पहले ही रची जा चुकी थी, आतंकियों के लिए ये एक सॉफ्ट टार्गेट था। जर्मन बेकरी वह रेस्टोरेंट था जहां विदेशियों का आना-जाना था और आतंकियों के लिए यहां धमाका करना आसान था। फिर भी हेडली ने इस जगह की दो बार रेकी की और उसके पुणे से जानकारी इकट्ठा करने के दो साल बाद ब्लास्ट को अंजाम दिया गया। जिसमें 16 लोग मारे गए और 65 लोग ज़ख़्मी हो गए।
13 फरवरी 2010 पुणे का जर्मन बेकरी रेस्टोरेंट। रोज़ाना की तरह यहां चहल- पहल थी। सभी किसी आनेवाले ख़तरे से बिल्कुल अंजान। यहां भारतीय थे, इरानी थे, अमेरिकन थे। पुणे का जाना- माना रेस्टोरेंट, लोगों के लिए आपस की खुशियां बांटने की एक जगह। रोमांस के लिए बेहद कूल प्लेस, यही पहचान थी जर्मन बेकरी की। कोई यहां की चाय के साथ अखबार में खो जाता तो कोई शेक के साथ प्यार में। स्टाफ भी इनकी खुशियों में शरीक हो जाता। सब कुछ सामान्य था। ओशो के आश्रम के पास सबसे ज़्यादा चहल- पहल यहीं पर होती थी। कोई नहीं जानता था कि ये चहल- पहल रुकनेवाली है। घड़ी की सूईंया रूक जाने वाली हैं, यहां कुछ अनहोनी होनेवाली थी।
शाम के 6 बजकर 15 मिनट पर एक धमाका हुआ और सब कुछ बदल गया। जर्मन बेकरी की तस्वीर बदल चुकी थी, हर तरफ अफरा- तफरी थी। सब कुछ टूट चुका था। जर्मन बेकरी का कोई हिस्सा बाकी नहीं था जहां मौत न पसरी हो। ख़ून से लथपथ शरीर बाहर आ रहे थे। कुछ बेजान हो चुके थे और कुछ में जान बाकी थी। यह एक आतंकवादी हमला था। हफ़्तों तक इसकी गूंज पूरे देश में सुनाई देती रही। हर रोज़ मरनेवालों के आंकड़े में इज़ाफा होता रहा। 16 लोग मारे गए, 65 से ज़्यादा ज़ख़्मी हो गए। धमाके से ठीक पहले रेस्टोरेंट के वेटर ने एक लावारिस बैग देखा था और वह उसे देखने के लिए आगे ही बढ़ा था कि उसे बाहर से एक शख़्स ने आवाज़ दी और एक गिलास पानी के 200 रुपए देकर चला गया। उसके जाने के तुरंत बाद धमाका हो गया। धमाके के लिए दहशतगर्दों ने मोबाइल का इस्तेमाल किया था जिसमें अलार्म लगाया गया था।
उस अलार्म के साथ ही विस्फोट हो गया। इस मामले में एटीएस ने हाल ही में यासिर भटकल के भाई अब्दुल समद भटकल को मंगलौर हवाई अड्डे से गिरफ़्तार किया था जो हत्या के एक मामले में वांछित था और पुणे ब्लास्ट के तुरंत बाद दुबई चला गया था। लेकिन वीज़ा ख़त्म होने पर वहां से लौट रहा था तो उसे मंगलौर एयरपोर्ट पर गिरफ़्तार कर लिया गया। बाद में मुंबई पुलिस उसके ख़िलाफ सबूत नहीं पेश कर सकी और समद को ज़मानत मिल गई। अब जाकर एटीएस ने इस मामले से जुड़े दो अहम आरोपियों को गिरफ़्तार किया है। जिनसे हासिल जानकारी के मुताबिक साज़िश का एक- एक हिस्सा पाकिस्तान की धरती से जुड़ा था और लश्करे-ए-तैयब्बा ने इंडियन मुज़ाहिद्दीन के साथ मिलकर जर्मन बेकरी में ब्लास्ट कराया। माना जाता है कि मुंबई बम धमाके के अहम आरोपी डेविड कोलमेन हेडली से हाल ही में अमेरिका में की गई पूछताछ के बाद इन दोनों आरोपियों के बारे में सुराग़ मिला और उन्हें गिरफ्तार किया जा सका। डेविड कोलमैन हेडली ने भी पुणे की रेकी की थी और वह भी इस धमाके की साज़िश में हिस्सेदार है।
हेडली ने पुणे में काफी सर्वे किया। उसने तस्वीरें खींचीं, वीडियोग्राफी की और सर्वे के बाद सारी जानकारी ख़ुद लेकर पाकिस्तान भी गया। जहां लश्कर के आकाओं को उसने पूरी जानकारी दी और उसी के आधार पर लश्कर ने अपने आदमियों को काम पर लगाया। भारत का दुश्मन नम्बर एक डेविड कोलमैन हेडली। हेडली ही वह शख़्स है जिसे काफी पहले से ही पता था कि पुणे में लश्कर अपने नाकाब मंसूबों को अंजाम देनेवाला है और इसके लिए लश्कर ने उसे भारत भेजा था। जब वह मुंबई में हमले की रणनीति बना रहा था और वहां का जायज़ा लेकर तस्वीरें सीमा पार भेज रहा था, उसी के आस- पास उसने पुणे में भी वक़्त गुज़ारा और वहां की रेकी की।
हेडली दो बार पुणे आया और अलग- अलग जगहों की तस्वीरें खींचकर पाकिस्तान अपने आकाओं तक भेजता रहा। इसी बीच वह ओशो के आश्रम में भी गया, जहां की वीडियोग्राफी कर लश्कर के आतंकियों को दिखाया। हेडली ने ट्रॉम्बे के बार्क कई फिल्म स्टूडियो और एनटीपीसी कोल्ड स्टोरेज की तस्वीरें भी सीमापार भेंजी। कुल मिलाकर करीब दो साल पहले ही पुणे ब्लास्ट की साज़िश रची जा चुकी थी और उसे अंजाम देने के लिए भारत से लश्कर के गुर्गे। पाकिस्तान में ट्रेनिंग लेने गए और जब वे लौटे तो उनके पास पूरा खाका था कि कैसे पुणे में ब्लास्ट को अंजाम देना है।
13 फरवरी 2010 के असल गुनहगार अभी भी क़ानून के शिकंजे में नहीं आ सके हैं। लेकिन जिसने इसकी शुरुआत की थी वे अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई की गिरफ़्त में है और हाल ही में भारतीय अधिकारियों ने उससे पूछताछ की है। जिसमें उसने कई राज़ उगले हैं और उसी का असर है कि महाराष्ट्र एटीएस ने दो लोगों को पुणे ब्लास्ट के सिलसिले में गिरफ़्तार किया है। हालांकि पड़ोसी देश पाकिस्तान हमेशा हेडली को लेकर सबूतों के लिए रोता रहता है। मंगलवार को भी उसने यही कहा कि हेडली को लेकर जो सबूत भारत से मिले हैं वह नाकाफी हैं।