Mon Sep 06 2010 12:16:12 GMT+0530 (India Standard Time)
चीन कहता है कि वह भारत का दोस्त है और उसका हितैषी है। लेकिन वह अपने इस दोस्त की पीठ में छुरा भोंकने से भी बाज़ नहीं आता। जब- जब चीन ने कहा कि वह दोस्त है, तब- तब उसने भारत के ख़िलाफ़ साज़िश रची और इस बार तो उसने भारत के सबसे बड़े दुश्मन पाकिस्तान से हाथ मिला लिया है। और उसी की सरज़मी से हिंदुस्तान को घेरने की कोशिश कर रहा है। चीन कश्मीर के ऊपरी इलाकों पर सालों से कुंडली मारकर बैठा हुआ है और अब उसकी नज़र हिंदुस्तान के स्वर्ग पर है। भारत के दो दुश्मन दोस्त बनकर एक साथ कश्मीर पर क़ब्ज़ा करने की फिराक में हैं और चीन ने इसीलिए पाकिस्तान में बिठा दिया है अपने हज़ारों सैनिकों को। साथ ही पूर्वोत्तर की सीमा पर तैनात कर दी है मिसाइलें। यही है रेड ड्रैगन की टेढ़ी चाल, दुश्मनों की गहरी साज़िश।
चीन और भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से आगे बढ़नेवाली अर्थव्यवस्थाएं हैं और माना जाता है कि 2020 तक एशिया महाद्वीप के दो मुल्क दुनिया को लीड करेंगे। शायद इसीलिए दोनों देशों ने सभी कड़वाहटों को भुलाकर आपसी कारोबार को तरजीह दी और अनुमान लगाया गया कि आनेवाले दिनों में चीन और भारत के बीच में 100 अरब डॉलर का कारोबार होगा। लेकिन चीन है कि बाज़ नहीं आता। उसने फिर चली है एक टेढ़ी चाल और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में तैनात कर दिए हैं अपने सैनिक। सफाई यह है कि पाकिस्तान में बाढ़ के बाद वहां चीन मदद कर रहा है। जबकि मदद के बहाने को रच रहा है भारत के ख़िलाफ़ साज़िश। रेड ड्रैगन एशिया को शतरंत की बिसात की तरह इस्तेमाल कर रहा है। उसे पता है कि यहां शह- मात का खेल अगर किसी के साथ है तो वह है भारत।
चीन के सपनों के रास्ते में भारत सबसे बड़ा रोड़ा है और इसीलिए चीन भारत को चारों तरफ से घेरने की तैयारी में लगा है। उसने पूर्वोत्तर में अपनी सामरिक ताक़त को बढ़ा दिया है और अब पाक अधिकृत कश्मीर में अपने जवानों को तैनात कर रहा है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने जब इस बात का खुलासा किया था तब से लेकर अब तक भारत सरकार ने इस पर चीन को कोई जवाब नहीं दिया। लेकिन चीन अपनी सफाई लेकर ज़रूर आ गया है। भारत सरकार ने पूछा भी नहीं लेकिन चीन दुहाई देने लगा कि हम पीओके में नहीं हैं। वहां चीनी फौज नहीं है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जियांग यू का बयान जारी किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि यह सब कोरी अफवाह है और गिलगिट में चीन ने फौजी तैनाती नहीं की है।
चीन तो पीओके में सेना की तैनाती से मुकर रहा है लेकिन न्यूयॉर्क टाइम्स ने 28 अगस्त को एक ख़बर प्रकाशित की जिसमें कहा गया कि चीन ने पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में 11 हज़ार सैनिकों की तैनाती की है। इस बात की तस्दीक की है अमेरिका के एक रक्षा विशेषज्ञ ने। जो आजकल गिलगिट में ही हैं। इनका नाम है सेलिज हेरिसन। हेरिसन का कहना है कि कहना मुश्किल है कि गिलगिट-बालटिस्तान बॉर्डर पर कितने चीनी सैनिक हैं, लेकिन यह कम से कम 7000 होंगे और ये खुंजेराब पास पर तैनात हैं। जहां ये काराकोरम हाईवे के निर्माण की सुरक्षा में लगे हैं और सब कुछ पीपल्स लिबरेशन आर्मी की निगरानी में ही हो रहा है। इस पर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल बासित का कहना है कि सब जानते हैं कि हेरिसन पाकिस्तान विरोधी हैं और भारत उनकी रिपोर्ट को लेकर बखेड़ा खड़ कर रहा है। सच यह है कि बाढ़ से ख़राब हो गई काराकोरम हाईवे की मरम्मत में चीन मदद कर रहा है। इसके अलावा अगर कोई कुछ सोचता है तो यह उसकी कोरी कल्पना भर है।
पाकिस्तान को यह बयान देने से पहले सोचना चाहिए था कि भारत ने तो इस बारे में अभी तक कुछ कहा ही नहीं है। न्यूयॉर्क टाइम्स में जब यह रिपोर्ट छपी तब से भारत ने बस हालात पर नज़र बानए रखा है और बिना जांच के कोई बयान नहीं देना चाहता। भारत जल्दबाज़ी में कोई क़दम नहीं उठाना चाहता। लेकिन यह पाकिस्तान का डर है जो उसने चीन को इस इलाके में घुसपैठ करने दी। दरअसल पाक अधिकृत कश्मीर में सरकार के खिलाफ विद्रोह बढ़ता जा रहा है और हालात अब पाकिस्तानी हुक्मरानों के हाथों में नहीं रहा है। लिहाज़ा उसने इस इलाके को चीन के हाथों में सौंप दिया है जो अब यहां से सीधे पश्चिमी एशिया के समुद्री इलाके तक पहुंच बनाने की कोशिश में है। इसी के लिए वह इस इलाके में हाईवे, एक्सप्रेसवे, रेलवे लाइन, कम्यूनिकेशन लाइन, गैस पाइप लाइन और बांधों का निर्माण कर रहा है। इसके बन जाने के बाद पूर्वी चीन से खाड़ी में पाक नौसैनिक अड्डे ग्वादार और बलूचिस्तान के ओरमारा तक पहुंचने में कार्गो और तेल टैंकर्स को सिर्फ 48 घंटे लगेंगे। साथ ही सामरिक दृष्टि से भी उसकी पकड़ मज़बूत हो जाएगी। खाड़ी देशों से सीधा सम्पर्क हो जाएगा।
अभी तक तो चीन इन इलाकों में निर्माण के लिए आर्मी को भेजता था जो रात के अंधेरे में निर्माण करते थे और फिर छिप जाते थे। लेकिन अब चीन इन इलाकों में खुलेआम रिहायशी इमारतें भी बना रहा है जिससे पता चलता है कि चीन इन इलाकों में सालों तक रुकने का इंतज़ाम कर रहा है। इतना ही नहीं चीन के सहयोग से पाकिस्तान ने इन इलाकों में 22 सुरंगे बना ली है। दरअसल ईरान से चीन के बीच बननेवाली गैस पाइप लाइन गिलगिट में काराकोरम से होकर गुज़रेंगी और इसके लिए सुरंगों की ज़रूरत है। लेकिन चीन ने ज़रूरत से ज़्यादा सुरंगे बनाई हैं, जो यह तस्दीक करती है कि चीन इन सुरंगों में अपनी मिसाइलों और टैंक को छिपाकर रखनेवाला है।
अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं कि ड्रैगन अपनी टेढ़ी चाल चलकर किसको शह दे रहा है। ज़ाहिर है अब बारी भारत की है कि वह ड्रैगन को जवाब दे। हालांकि चीन की पाकिस्तान में दखलंदाज़ी अमेरिका के लिए भी चिंता का सबब है और अगर चीन को पाकिस्तान के रास्ते खाड़ी देशों तक पहुंच मिलती है तो अमेरिका पाकिस्तान से नाराज़ हो सकता है। ऐसे में भारत और अमेरिका मिलकर चीन पर दबाव डाल सकता है कि वह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से बाहर निकल जाए। इससे पहले चीन ने तिब्बत और अरुणाचल से लगनेवाली सीमा पर अपनी सामरिक चहल-पहल को बढ़ाया। अपनी लम्बी दूरी की मिसाइलें तैनात कर दीं और वायुसेना को अलर्ट पर रखे हुए है। चीन की इस चाल को देखते हुए भारत को भी सीमा पर अपनी मिसाइलें तैनात करनी पड़ीं और फाइटर प्लेन्स को भी तैयार कर दिया गया है। साथ ही भारत अब सीमाई इलाकों में सड़कों का जाल भी बिछाने लगा है।
चीन की भारत से सबसे बड़ी लड़ाई पूर्वोत्तर सीमा को लेकर है और पूर्वोत्तर के सीमा विवाद पर वह भारत सरकार पर दबाव बनाने की अच्छी खासी रणनीति तैयार कर चुका है। इसीलिए उसने पीओके को चुना है। उत्तरी सीमा पर अपनी पहुंच बनाकर चीन भारत पर पूर्वोत्तर सीमा के लिए आसानी से दबाव बना सकता है और चीन को पता है कि ऐसा करने पर भारत आक्रामक मूड में आ सकता है। लिहाज़ा उत्तरी सीमा पर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में अपने फौज भेजने से पहले उसने पूर्वोत्तर में ख़ुद को मज़बूत किया। वहां सीमा के पास चीन ने परमाणु क्षमता से लैस बैलिस्टिक मिसाइल्स को तैनात कर दिया। पेंटागन से जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने भारतीय सीमा के पास लंबी दूरी तक मार करनेवाली उन्नत किस्म की सीएसएस-5 मिसाइल्स को तैनात किया है। साथ ही उसने आकस्मिक योजनाएं भी तैयार कर ली हैं, जिसके तहत वायुसेना को जल्द से जल्द इस क्षेत्र तक पहुंचने में सुलभ बनाया गया है। यह चीन की बेहद सोची समझी चाल है जिसके तहत वह दो तऱफ से भारत पर हमला करने की फिराक में है।
हालांकि भारत सरकार ने पूर्वोत्तर को सुरक्षित करने के लिए कई कड़े क़दम उठाए हैं। भारत ने भी 2000 किलोमीटर तक मार करनेवाली बैलिस्टिक मिसाइल्स को सीमा पर लगा दिया है। इसमें अग्नि-2 और पृथ्वी-3 को शामिल किया गया है। ये मिसाइल्स अपने साथ परमाणु बम भी ले जा सकती है। मिसाइल्स की तैनाती के लिए सेना ने हाल ही में पश्चिम उत्तर बंगाल में ज़मीन ख़रीदी है। साथ ही तेजपुर और छाबुआ छावनियों में सुखोई-30 एकेआई फाइटर प्लेन्स को भी तैनात किया गया है और आर्मी की पहुंच को और मज़बूत बनाने के लिए सरकार ने सेना के नियमों में बदलाव करते हुए चीन की सीमा के पास 70 सामरिक सड़कों का निर्माण भी कर रही है। ज़ाहिर है पूर्वोत्तर से अगर चीन ने घुसने की कोशिश की तो उसे मुंहतोड़ जवाब मिलेगा।
अगर दहशत की फैक्ट्री हिंदुस्तान के कंधों पर सवार है तो ड्रैगन भी सरहदों पर पैर पसार रहा है। हिंदुस्तान के दुश्मन एक हो रहे हैं। हमसे जबरन छीना गया कश्मीर का हिस्सा वे आपस में बांट रहे हैं। पाकिस्तानी कब्ज़े वाले कश्मीर में फहराया जाने वाला झंडा भले ही हरे रंग का हो, लेकिन तूती वहां लाल झंडे की ही बोल रही है। हिंदुस्तान की सरज़मीं का सौदा हो रहा है। पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर पर अब इस्लामाबाद से ज़्यादा बीजिंग की तूती बोलती है। हाल ही में सिंगापुर से लौटे सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस बात को लेकर सरकार को आगाह किया है। ऐसा नहीं कि सरकार इस ख़तरे से बेखबर है। चीन पहले भी ऐसे नक्शे बांटता रहा है जिसमें कश्मीर को हिंदुस्तान से अलग दिखाया गया है। कश्मीर के बाशिंदों को मिलने वाले वीज़ा में भी भेदभाव पर जमकर बवाल हो चुका है। पहले यह सिर्फ अफगानिस्तान था लेकिन अब चीन के रणनीतिकार हिंदुस्तान को उत्तरी बॉर्डर पर उलझाने की फिराक में हैं। कश्मीर को लेकर चीन के कड़े रुख़ को एशिया में भारत के बढ़ते रसूख के साथ जोड़कर भी देखा जा रहा है। पाकिस्तान के साथ उसकी सांठगांठ पहले से उलझी हिंदुस्तानी सरहदों पर कशीदगी बढ़ा सकती है।
तू डाल-डाल, मैं पात-पात। चीन की एक करतूत पर भारत ने कुछ ऐसा ही रुख अपनाया। यह ज़्यादा पुरानी बात नहीं, अभी अगस्त के आखिरी दिनों में ही चीन ने यह कहते हुए भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल बीएस जसवाल को वीज़ा देने से इन्कार कर दिया था कि वह जम्मू कश्मीर जैसे संवेदनशील इलाके में सेना के कमांडर हैं। जवाब में भारत ने भी चीन की सेना के तीन अधिकारियों को वीजा देने से इंकार कर दिया था। हम दोस्ती का हाथ बढ़ाते हैं, वह उसे मरोड़ने की कोशिश करता है। हमारे पड़ोसियों में पाकिस्तान ही नहीं, चीन की भी यही हकीकत है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में ड्रैगन की चहल- पहल बढ़ी। उससे पहले ही चीन ने कश्मीर को लेकर भारत पर एक कूटनीतिक वार कर दिया था। अगस्त के महीने में भारतीय सेना की उत्तरी कमान के कमांडर इन चीफ़ लेफ्टिनेंट जनरल बीएस जसवाल दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग कार्यक्रम के तहत बीजिंग जानेवाले थे। लेकिन चीन ने उन्हें वीज़ा देने से इनकार कर दिया था।
चीन की इस हिमाकत पर विदेश मंत्रालय ने भी तब अपना रुख़ कड़ा कर लिया था और चीनी राजदूत को बुलाकर ऐतराज़ दर्ज कराया था। सूत्रों के मुताबिक भारत ने चीन के साथ रक्षा सहयोग को भी फिलहाल मुल्तवी कर दिया। नई दिल्ली के लिए चीन का यह बर्ताव इसलिए भी हैरानी भरा था क्योंकि अगस्त 2009 में उसने तत्कालीन आर्मी चीफ़ वीके सिंह के दौरे पर कोई ऐतराज़ नहीं उठाया था। हालांकि वह उस वक्त ईस्टर्न कमांड को संभाल रहे थे जिसके तहत अरुणाचल प्रदेश है। अरुणाचल के लोगों को चीन पहले से अपना नागरिक मानता है लेकिन कश्मीर पर उसके रुख़ को वहां के ताज़ा हालात और इस्लामाबाद के साथ उसकी नज़दीकियों के साथ जोड़कर देखा गया। अब अमेरिका ने भी ज़ाहिर कर दिया है कि भारत के उत्तरी छोर पर पीओके में चीन की दखलंदाज़ी बढ़ गई है, जो चिंता का विषय है।