Mon Aug 30 2010 22:08:44 GMT+0530 (India Standard Time)
पाक क्रिकेटरों की एक पोल खुली तो पीछे-पीछे कई पोल खुलने लगी। एक के बाद एक फिक्सिंग की कहानियां और हर किसी में पाक खिलाड़ियों का हिस्सा। ऐसा लगता है कि वे क्रिकेट को भूल गए हैं, खेल को भूल गए हैं, देश को भूल गए हैं और उन्हे सिर्फ दिख रहा है तो पैसा। पैसा और पैसा। अब वे चाहे जिस क़ीमत पर आए कहने का मतलब पाकिस्तानी टीम बन चुकी है फिक्सिंग फैक्ट्री।
पाकिस्तान बाढ़ की तबाही झेल रहा है, आतंकवाद का दंश झेल रहा है और अब पाकिस्तानी क्रिकेटरों ने अपने देश पर लगा दिया है एक और कलंक। फिक्सिंग का कलंक। यह कलंक ऐसा है जो ताज़िंदगी छूटनेवाला नहीं है। नए- नए खुलासे हो रहे हैं और इससे पाकिस्तानी सरकार फजीहत झेल रही है। लेकिन अब एक नया डर सामने आ गया। पाकिस्तानी क्रिकेट खिलाड़ी हैं तो लंदन में लेकिन उनकी रूह कांप रही है। कप्तान सलमान बट्ट को डर लग रहा है। तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद आमेर और मोहम्मद आसिफ की सांसें तेज़ हो चुकी हैं। विकेटकीपर कामरान अकमल के माथे से पसीने टपक रहे हैं। ये सभी पाकिस्तानी ज़मीन पर क़दम रखना नहीं चाहते, क्योंकि वहां कोई है जो इनका बेसब्री से इंतज़ार कर रहा है। वे और कोई नहीं, वे हैं आतंक के सौदागर।
दरअसल फिक्सिंग को लेकर हो रही पाकिस्तान की बदनामी से आतंकवादियों को भी गुस्सा आ गया है और उन्होंने इन खिलाड़ियों पर रखा है इनाम। ब्रिटिश अख़बार डेली स्टार ने यह दावा किया है कि लंदन में कई पाकिस्तानी खिलाड़ी इसे लेकर दहशत में हैं। हालांकि अख़बार ने किसी आतंकवादी संगठन का नाम नहीं लिया है, लेकिन यह साफ किया गया है कि लंदन में तो वे सुरक्षित हैं लेकिन सबसे ज़्यादा ख़तरा उन्हें घर वापसी पर होगा। ज़ाहिर है अगर आतंकी नाराज़ हैं तो पाकिस्तानी ज़मीन उनके लिए सबसे ख़तरनाक साबित होनेवाली है। इन खिलाड़ियों पर आरोप है कि ये स्पॉट फिक्सिंग के ज़रिए लाखों-करोड़ों कमाने के चक्कर में फंसे थे। खेल और देश को ताक पर रखकर ये बस पैसे बनानेवाली बदमाश कम्पनी बन चुके थे। इससे पूरी दुनिया में थू-थू हो रही है और अगर डेली स्टार अख़बार की मानें तो अब आतंकी भी इनसे नाराज़ हैं और इन पर घोषित हो चुका है इनाम।
जिस बुकी मज़हर मजीद ने फिक्सिंग का पूरा गेम रचा, उसने स्टिंग ऑपरेशन में सबसे पहले नाम लिया था मोहम्मद आमेर का और मोहम्मद आसिफ का। आसिफ भले ही अब कैमरे के सामने न बोल रहा हो लेकिन उसकी पुरानी प्रेमिका ने उसका हर राज़ कैमरे के सामने खोल दिया। वीणा मलिक जिसका दावा है कि आसिफ को फिक्सिंग की लत लगी हुई है और पिछले साल ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के बीच हुई सीरिज भी फिक्स की थी। हसीना पाकिस्तानी गेंदबाज मोहम्मद आसिफ की पूर्व गर्लफैंड वीना मलिक है, जिन्होंने फिक्सिंग मामले को दे दिया है नया मोड़। वीना मलिक ने खोले हैं मैच फिक्सिंग के नए राज। वीना के मुताबिक आसिफ ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हुई टेस्ट सीरीज में भी फिक्सिंग की थी। जी हां ये वही टेस्ट सीरीज है जिसमें पाकिस्तान पांचशून्य से हारा था। इतना ही नहीं पाकिस्तानी अदाकारा ने आसिफ के हिंदुस्तानी सटोरिए धीरज दीक्षित के साथ संबंधों का खुलासा भी किया है। वीना ने आरोप लगाया है कि आसिफ और धीरज दोनों मिलकर फिक्सिंग किया करते थे। इसके अलावा आसिफ की पूर्व गर्लफ्रैंड ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को भी कटघरे में खड़ा किया है।
याद कीजिए ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच शून्य से सीरीज हारने के बाद पीसीबी ने कुछ खिलाड़ियों को तलब किया था। आसिफ समेत सात खिलाड़ियों को सजा भी सुनाई थी, लेकिन पीसीबी पूरे मामले पर कितनी कठोर थी वह दो महीने बाद ही सामने आ गया। मोहम्म्द यूसुफ को माफ कर दिया गया तो कुछ पर से बैन ही हटा लिया गया। कुल मिलाकर अगर देखा जाए तो कहीं ना कहीं वीना मलिक के इन आरोपों को झुठलाया नहीं जा सकता। पर दूसरी तरफ सच यह भी है कि अगर आसिफ के बारे में वह इतना सब कुछ जानती थी तो उसने पहले यह सच दुनिया के सामने क्यों नहीं लाई।
क्रिकेट भारत में हो या पाकिस्तान में यह महज खेल नहीं, मजहब है, जुनून है। इस खेल का रोमांच हार और जीत के लिए दर्शकों का जुनून कुछ लोगों के लिए अकूत मुनाफे का बहुत बड़ा कारोबार बन चुका है जिसमें शामिल हैं कई क्रिकेटर्स भी। लार्ड्स टेस्ट में तीसरे ओवर की पहली गेंद पर फेंका गया मोहम्मद आसिफ का नोबॉल क्रिकेट के इतिहास का सबसे बड़ा नोबॉल हो न हो, सबसे मशहूर नो बॉल जरूर बन चुका है। लेकिन क्रिकेट मे स्पॉट फिक्सिंग का यह क्या अकेला मामला है। नाटिंघम टेस्ट में पाकिस्तान टीम ने 10 नोबॉल फेंके थे। तो क्या ये नोब़ॉल भी फिक्स थे ? क्या इस कैच का छूटना फिक्स था ? नोबॉल, वाइडबॉल या मिस्ड कैच, अगर खेलनेवाली टीम पाकिस्तान हो तो हर गेंद के पीछे एक कहानी होती है। ये खिलाड़ी वह नहीं जो मुल्क के लिए खेलते हैं, ये तो वह खिलाड़ी हैं जो मैच के पहले बुकीज से पूछते हैं क्या हुक्म है मेरे आका। दरअसल क्रिकेट महज खेल नहीं रहा, दुनिया भर के सटोरियों के लिए यह बहुत बड़ा कारोबार है। इसके लिए बातचीत बैंकाक मे होती है तो रकम स्विस बैंक में जमा होती है।
स्कॉटलैंड यार्ड के मुताबिक मजहर मजीद ने कबूल किया है कि महज एक मैच को फिक्स करने के लिए उसे 8 लाख तीस हजार पाउंड यानी लगभग सात करोड़ की रकम मिली। 35 साल के मजहर मजीद पर न्यूज ऑफ द वर्ल्ड के रिपोर्टर से 1लाख पचास हजार पाउंड की रिश्वत लेकर लार्ड्स टेस्ट में मोहम्मद आसिफ और मोहम्मद आमेर से ऑन डिमांड नोबॉल डालने के लिए कहने का इल्जाम है। अब सवाल नॉटिंघम टेस्ट को लेकर भी उठ रहे हैं जहां सीरिज के पहले मैच में पाकिस्तानी टीम ने कई नोबॉल और वाइड बॉल फेंकी थी। ब्रिटेन के अखबार द सन के मुताबिक पिछले महीने नाटिंघम के ट्रेंट ब्रिज में इंगलैंड और पाकिस्तान के बीच सीरीज का पहला मैच भी फिक्स था और फिक्सिंग के इस खेल में पाकिस्तान टीम के कई खिलाड़ी शामिल थे।
वहीं ऑस्ट्रेलिया के अखबार द ऑस्ट्रेलियन के मुताबिक मजीद ने स्कॉटलैंड यार्ड को बताया है कि इस साल जनवरी में सिडनी टेस्ट भी फिक्स था और इस मैच को फिक्स करने के लिए भारत के एक बेटिंग सिंडिकेट ने उसे 65 लाख रुपये दिए थे। इस मैच में पाकिस्तान तयशुदा जीत के करीब होकर भी बुरी तरह हार गया था। मजीद बीते ढाई सालों से फिक्सिंग के काले कारोबार में शामिल था। अब उन सभी मैचों पर सवाल खड़े हो गए हैं जो इस दौर मे पाकिस्तानी की टीम ने खेला है। ब्रिटेन के अखबार द डेली टेलीग्राफ के मुताबिक आईसीसी का जांच दल इस मामले की तफ्तीश करने दुबई से लंदन पहुंच चुका है और इस दौरान खेल गए सभी 82 टेस्ट और वनडे मैचों के रिकार्ड खंगाले जा रहे हैं। वहीं स्कॉटलैंड यार्ड की इकोनोमिक ऑफेंस विंग भी इस मामले की तफ्तीश कर रही है।
अब उस शख़्स के बारे में जान लेते हैं जो खिलाड़ियों का सौदा करता था। जी हां, बुकी मज़हर मजीद जिसे कभी लंदन के उसके मोहल्ले में भी ज्यादा लोग नहीं जानते थे। लेकिन न्यूज ऑफ द वर्ल्ड के स्टिंग ने इस अनाम से शख्स को दुनिया भर में एक पहचान दे दी। भले ही वह बदनामी के शक्ल में आई। रन के साथ- साथ पैसे बनाने का यह खेल अरसे से जारी था। नो बॉल फिक्स्ड, वाइड बॉल फिक्स्ड, कैच का लेना फिक्स, कैच का छूटना फिक्स। 35 साल के मजहर मजीद को महज तीन साल पहले तक क्रिकेट में कोई दिलचस्पी नहीं थी। वह साउथ लंदन का एक मामूली प्रॉपर्टी डीलर था। जिसके पास एक मामूली फुटबॉल क्लब था। उसके ऊपर हजारों पाउंड का बकाया था, उसे देनदारों से छिपकर बचकर रहना पड़ता था। लेकिन वह अमीर बनना चाहता था, परेशानी यह थी कि वह जो भी कंपनी शुरू करता था वह चंद महीने ही चल पाती थी।
फिर उसे क्रिकेट में कारोबार करने की सूझी। उसने ब्लू स्काई डेवलपमेंट नाम से एक कंपनी खोली और पाकिस्तानी खिलाड़ियों को स्पांसरशिप दिलाने का काम करना शुरू किया। ब्लू स्काई कंपनी भी मजीद की बाकी कंपनियों की तरह ही डूब गई लेकिन मजीद पाकिस्तानी टीम के कई खिलाड़ियों के बेहद करीब आ गया। वह टीम के कई खिलाड़ियों का ऑफिसियल एजेंट भी बन गया और फिर शुरू हो गया स्पॉट फिक्सिंग के नाम पर अकूत कमाई का धंधा। स्पॉट फिक्सिंग यानी सेकेंड में करोड़ों की कमाई। गेंद बॉलर के हाथ में होती थी लेकिन तय मजीद करता था कि अगली गेंद ऑउट साइड द ऑफ स्टंप होगी या लेग स्टंप के। पाक टीम के सात खिलाड़ी मजीद के इशारे पर सब कुछ करने को तैयार थे, कैप्टन टॉस जीत कर बैटिंग या बॉलिंग लेने का फैसला मजीद से पूछ कर करता था। गेंदबाज पैसे लेकर बताए ओवर में नोबॉल से बाउंसर फेंकते थे।
जमा हुआ बैट्समैन मजीद के बताए ओवर में खराब शॉट खेलकर आउट हो जाता था। और यह सब कोई एक या दो मैच में नहीं हुआ। यह हुआ पूरे 82 मैचों में, इसमें टी- 20 से लेकर टेस्ट और वनडे तक यानी हर तरह का क्रिकेट शामिल था। नतीजा मजीद नाकाम बिजनैसमैन से टायकून बन गया जिसके पास लंदन के बेहद पॉश इलाके में दो करोड़ का आलीशान बंगला था, महंगी गाड़ियां थीं और जेब में हर वक्त लाखों पाउंड। बीते दो सालों में उसकी हैसियत और रसूख में जिस तरह इजाफा हुआ उससे उसे जाननेवाले कई शख्स हैरान थे। लेकिन मजीद को उनकी हैरानी से कोई परेशानी नहीं थी। वह एक अलग ही जिंदगी जी रहा था, ऐसी जिंदगी जहां सुबह सिडनी में होती है तो शाम बैंकॉक में। ऐसी जिंदगी जहां जिन खिलाड़ियों की एक झलक देखने के लिए उनके मुरीद कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहते हैं, वे नामचीन खिलाड़ी उसके एक फोन कॉल पर हाजिर हो जाते थे। जब तक ये सब पर्दे के पीछे था, पैसे बरस रहे थे, जिंदगी जन्नत थी, लेकिन अब क्रिकेट का काला सच सामने आ गया है, मजीद की असलियत सामने आ गई है। मजीद के लिए जिंदगी अब जन्नत नहीं रही।
दरअसल पाकिस्तान में फिक्सिंग का इतिहास बहुत पुराना है, इससे पहले भी पाकिस्तान के कई खिलाड़ियों ने पाक क्रिकेट का दामन दागनुमा किया है। पाकिस्तान में फिक्सिंग का जिन्न आज से नहीं बल्कि कई सालों से तहलका मचा रहा है। क्रिकेट से ज्यादा पाकिस्तान ने फिक्सिंग में ही महारत हासिल की है। पहली बार साल 1994 में मार्क वॉ और शेन वॉर्न ने पाकिस्तान के खिलाड़ी सलीम मलिक पर आरोप लगाए कि मलिक ने उन्हें कराची टेस्ट में खराब गेंदबाज़ी और मैच हारने के लिए अप्रोच किया था। इसके बाद साल 1998 में पाकिस्तान के तेज़ गेंदबाज़ अताउर रहमान ने वसीम अकरम पर आरोप लगाए और कहा कि न्यूज़ीलैंड के खिलाफ उन्हें खराब गेंदबाज़ी करने के लिए अकरम ने 3 लाख रुपए की पेशकश की थी। इसके तुरंत बाद रशीद लतीफ ने अकरम, मलिक, इंज़माम उल हक और एजाज अहमद पर फिक्सिंग के इल्ज़ाम लगाए। साल 2000 में इसी कड़ी में सलीम मलिक और अताउर रहमान पर लाइफ टाइम बैन लगा दिया गया। साथ ही साथ यह भी फैसला लिया गया कि वसीम अकरम और मुश्ताक अहमद को पाक टीम का कप्तान कभी नही बनाया जाएगा।
हालांकि इसके बाद 2006 में रहमान और इसके बाद 2008 में मलिक के उपर से बैन हटा लिया गया। इस साल सिडनी टेस्ट में कामरान अकमल पर भी कैच छोडने के लिए पैसे लेने के आरोप लगे और इसी कड़ी में पीसीबी ने कई क्रिकेटरों पर बैन और जुर्माना लगाया। इसी साल पाक स्पिनर दानिश कनेरिया इंग्लैंड काउंटी में स्पॉट फिक्सिंग के मामले में गिरफ्तार किए गए। और अब यह पाक क्रिकेट इतिहास का फिक्सिंग का सबसे बड़ा मामला, जिसमें पाकिस्तान के 18 साल के युवा क्रिकेटर मोहम्मद आमेर का नाम भी सामने आया है। फिक्सिंग का यह ताज़ा मामला पूरी तरह साफ करता है कि पाकिस्तान के क्रिकेट के ढांचे में ही कहीं कोई दिक्कत है, तभी तो आए दिन फिक्सिंग के मामले इसी देश से सामने आते हैं। बुकी मजीद के मुताबिक पाकिस्तानी क्रिकेटरों को खेल से कोई लेना-देना नहीं था। उनके लिए देश की इज़्ज़त भी कोई बड़ी बात नहीं थी। उनको तो बस पैसे चाहिए थे, औरतें चाहिए थीं और आलिशान जगहों पर लज़ीज़ खाने चाहिए थे। गवाही दे रहा है वह वीडियो जिसमें न्यूज़ ऑफ द वर्ल्ड का रिपोर्टर मिला बुकी मजीद से और फिर मिला पाकिस्तानी क्रिकेटरों से। जिन्हें मजीद ने बड़ी ही सफाई से दे दी फिक्सिंग में एडवांस के तौर पर मिली रकम।
न्यूज़ ऑफ द वर्ल्ड के रिपोर्टर को मैच फिक्सिंग की यह कहानी बाहर निकालने के लिए कम से कम 2 हफ़्ते तक काम करना पड़ा। उसने पहले माजिद से मेल-जोल बढ़ाया, लेकिन वह फिक्सिंग को लेकर खुल नहीं रहा था। लिहाज़ा रिपोर्टर माजिद के साथ टेस्ट मैच भी देखने गया। जब माजिद थोड़ा खुला तो उसे यकीन दिलाने के लिए पहले कुछ पैसे देने थे और 19 अगस्त को लंदन के बॉम्बे ब्रासरी रेस्टोरेंट के बाहर दोनों की कार में मुलाक़ात हुई। जहां माजिद को रिपोर्टर ने बतौर एडवांस 10 हज़ार पाउंड दिए और माजिद ने भरोसा दिलाया कि इससे वह सट्टा लगाकार कई गुना कमा सकता है। इसके बाद माजिद कार से निकला और रेस्टोरेंट में कुछ पाकिस्तानी खिलाड़ियों से रिपोर्टर की मुलाक़ात कराई और जब वे रेस्टोरेंट से बाहर निकले तो माजिद ने अपने जैकेट में रखे 10 हज़ार पाउंड की रकम दो पाकिस्तानी खिलाड़ियों उमर आमिन और वहाब रियाज़ को दिखाए और फिर उसने अपनी जैकेट उतारी और उनमें से एक खिलाड़ी को पहना दिया। साफ था पैसे का लेन-देन हो चुका था। कहने का मतलब कैमरे पर पांच पाकिस्तानियों की करतूत सामने आ चुकी है। जिनमें शामिल हैं मोहम्मद आमिर, मोहम्मद आसिफ, सलमान बट्ट, उमर आमिन और वहाब रियाज़। माजिद ने रिपोर्टर से बात करते हुए पाकिस्तानी विकेट कीपर कामरान अकमल का भी नाम लिया और कहा कि उसकी मुट्ठी में 7 पाकिस्तानी खिलाड़ी हैं। यानी 6 के चेहरे सामने आ चुके हैं और 7 अभी बाकी हैं।
लंदन के एक अखबार ने स्टिंग ऑपरेशन कर खुलासा किया है कि पाकिस्तानी खिलाड़ी मैच फिक्सिंग में लिप्त हैं। इंग्लैंड के साथ खेली जा रही टेस्ट सीरीज़ में चौथे मैच के पहले और दूसरे दिन स्पॉट फिक्सिंग के तहत पाकिस्तानी खिलाड़ियों को नोबॉल डालने के लिए खरीदा गया था और उन्होंने इसी के तहत मैच में तीन नो बॉल डाले। बुकी ने पाकिस्तान के चार खिलाड़ियों कप्तान सलमान बट्ट, तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद आमिर और मोहम्मद आसिफ और विकेटकीपर कामरान अकमल का नाम लिया है और फिल्ड पर ये लोग इसे साबित भी कर रहे हैं। क्रिकेट इतिहास की सबसे बड़ी मैच फिक्सिंग सबसे ना-पाक खिलाड़ी और उनकी सबसे नापाक करतूत। लंदन के न्यूज़ ऑफ द वर्ल्ड टैब्लॉयड ने यह खुलासा किया है कि लॉर्ड्स में खेली जा रही टेस्ट मैच सीरीज़ में पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने ख़ुद को बेच दिया।
इसके लिए उन्होंने एक पाकिस्तानी फिक्सर की मदद ली जिसने 1.5 लाख पाउंड में सौदा तय किया। 26 अगस्त को इंग्लैंड और पाकिस्तान क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स के मैदान पर चौथा टेस्ट मैच खेलनेवाले थे और उससे ठीक एक दिन पहले 35 साल के मज़हर माजिद ने मैच को फिक्स कर दिया। पाकिस्तान मैच हारनेवाला था। न्यूज़ ऑफ द वर्ल्ड के अंडर कवर रिपोर्टर ने माजिद को कैमरे पर पकड़ने के लिए जाल बिछाया और 25 अगस्त को उसे पश्चिमी लंदन के कॉपथोर्न तारा होटेल में बुलाया गया। यहां होटेल के रूम में पहले से ही स्पाई कैम लगे हुए थे और कैमरे के सामने माजिद ने बताया कि कैसे-कैसे उसके लड़के यानी पाकिस्तानी खिलाड़ी नो बॉल फेकेंगे जिससे कन्फर्म होगा कि मैच फिक्स है। माजिद ने रिपोर्टर को बताया कि पहली इनिंग में पाकिस्तान की ओर से बॉलिंग करने के लिए सबसे पहले आमिर आएगा और तीसरे ओवर की पहली गेंद नो बॉल करेगा।
आमिर का नो बॉल पूरी तरह लगता है कि जानबूझकर फेंका गया। आमिर के कदम सफेद रेखा के काफी आगे पड़ा, लेकिन इसे ढकने के लिए आमिर का नाटक देखने लायक था। उसने पहले लाइन पर पैर रगड़े, फिर उस पर डस्ट मंगाकर गिरवाए। बात यहीं कहां ख़त्म होनेवाली थी। मैच फिक्सिंग में तीन नोबॉल का वादा था और दूसरी नोबॉल आनेवाली थी। दसवें ओवर की आख़िरी गेंद पर जिसे फेंकनेवाले थे आसिफ़। आसिफ़ ने भी ठीक आमिर के अंदाज़ में नोबॉल डाली और फिर उसने भी डस्ट मंगाकर नाटक दिखाया। तीसरी नोबॉल के लिए पहले दिन वक़्त नहीं मिला, क्योंकि ख़राब मौसम के चलते शाम 5.45 पर मैच को रोक दिया गया। लिहाज़ा माजिद ने फोन कर के बताया कि वह अपना वादा निभाएगा और अगले दिन यानी मैच के दूसरे दिन आमिर अपनी तीसरे ओवर की तीसरी गेंद नो बॉल देगा और इस पर वह जितना चाहे उतना सट्टा लगवाकर कर कमा ले।
दूसरे दिन का मैच जब शुरू हुआ तो आमिर के तेवर बदले हुए थे। आमिर ने इंग्लिश टीम की कमर तोड़ दी और तीसरे, चौथे और पांचवे नम्बर पर उतरे केविन पीटरसन, पॉल कॉलिंगवुड और इयॉन मॉर्गन को बिना खाते खोले ही पवेलियन भेज दिया और ऐसा क्रिकेट के इतिहास में पांचवी बार हुआ था। लगने लगा था कि पाकिस्तान ने मैच को अपने हाथों में ले लिया है और इसकी वजह से माजिद ने रिपोर्टर को फोन कर बोला कि हो सकता है कि जो नोबॉल जानी थी वह कैंसिल हो गई है और उस पर सट्टा लगाना रोक दे। लेकिन आमिर उस दिन का तीसरा ओवर फेंक रहे थे और जब तीसरी बॉल फेंकनी थी तो कप्तान सलमान बट्ट ने ओवर के बीच में उनसे बात की। ऐसा लग रहा था कि दोनों की बातचीत फिल्ड प्लेसमेंट के लिए होगी। लेकिन फिल्ड प्लेसमेंट में कोई बदलाव नहीं हुआ और तीसरे ओवर की तीसरी गेंद फेंकने गए आमिर ने एक बार फिर सफेद लाइन को क्रास किया और दे दिया नोबॉल।
इन तीन नोबॉल्स के लिए माजिद ने 1.5 लाख पाउंड लिए। उसे पहले ही एडवांस के तौर पर 10 हज़ार पाउंड दिए जा चुके थे और 25 अगस्त को होटेल के रूम में एक लाख 40 हज़ार पाउंड दिए गए। जिसमें 50-50 पाउंड के नोटों के बंडल थे। माजिद ने बकायदा इन्हें गिना और फिर वहां से निकल गया। बाद में उसने उसी रात को पाकिस्तानी खिलाड़ियों को फोन किया। उन्हे गालियां दी, फिर मैच फिक्सिंग का इशारा किया और सब कुछ रिपोर्टर के सामने हुआ। इस मैच में पाकिस्तन ने पहली इनिंग में 74 रन बनाए और दूसरी इनिंग 147 रन बनाए और मैच हार गए। ज़ाहिर है माजिद की डीलिंग सिर्फ रिपोर्टर से नहीं हुई थी। मैच हारने को लेकर उसकी डीलिंग कहीं और भी हुई थी। जिसका इशारा वह रिपोर्टर को पहले ही दे चुका था।