ताज़ा समाचार
यूपी में पहले चरण का मतदान ख़त्म, रिकॉर्डतोड़ 60 फ़ीसदी वोटिंग। वोटिंग के दौरान सतह पर आई कांग्रेस की अंतर्कलह, पीएल पुनिया पर बोले बेनी वर्मा- वह आए हैं पंजाब से। मोदी को फिर पड़ी लताड़, 2002 के दंगे पर हाईकोर्ट ने कहा- सरकार के नाकारापन से बिगड़े हालात। कर्नाटक में महंगा पड़ा अश्लील वीडियो कांड, तीन मंत्रियों को देने पड़े इस्तीफ़े। पर्थ वन डे में भारत ने श्रीलंका को 4 विकेट से हराया.

Exclusive News

सैलाब

Bookmark and Share
Sat Sep 11 2010 15:49:57 GMT+0530 (India Standard Time)

कुदरत का मूड ख़राब है, हरियाणा के यमुना नगर से लेकर दिल्ली और यूपी के तमाम उन इलाकों में ख़तरा मंडराने लगा है जहां से यमुना नदी बहती है। कई ऐसे इलाके हैं जहां सैलाब आ चुका है और इस सैलाब में ज़िदगी संघर्ष कर रही है। दिल्ली में 32 साल बाद फिर सैलाब आनेवाला है जिसकी वजह से राजधानी में ख़ौफ़ है। इतना ही नहीं करीब- करीब आधी दुनिया सैलाब में डूब चुकी है। लाखों ज़िंदगियां तबाह हो चुकी है। कुदरत के क़हर के आगे इंसानों की एक नहीं चल रही। ज़िंदगी तबाह कर दी है सैलाब ने।

दिल्ली में आनेवाला है सैलाब। यमुना तोड़ देगी सरहदें। डूब जाएंगे दिल्ली के कई इलाके। हरियाणा के रास्ते से सैलाब बढ़ा आ रहा है और दिल्ली में घुसने ही वाला है। वज़ीराबाद की ओर से सैलाब कई इलाकों को अपनी चपेट में लेते हुए आईटीओ, निज़ामुद्दीन, खेल- गांव, डीएनडी, कालिन्दी कुंज, सरिता विहार में घुस चुका है। दिल्ली के ये वह इलाके हैं जिन पर है सबसे ज़्यादा ख़तरा। हरियाणा में यमुनानगर के हथिनीकुंड बैराज से 6 लाख 7 हज़ार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है और वह शुक्रवार की सुबह तक दिल्ली में पहुंच जाएगा और फिर यहां मचेगी तबाही।

एहतियातन यमुना से लगे निचले इलाकों को खाली करा दिया गया है, लेकिन ख़तरा बरक़रार है। पहले से ही भारी बारिश की वजह से यमुना नदी पूरे उफान पर है और निचले इलाकों में पानी घुसने लगा है। 32 साल पहले 1978 में दिल्ली ने यमुना का गुस्सा देखा था उस वक़्त यमुना में इतना पानी नहीं आया था जितना अभी आ रहा है। ज़ाहिर है इस बार यमुना में पानी ज़्यादा होगा। यमुना पहले से सकरी भी हो चुकी है और पहले ही प्रदूषित है जिससे बाढ़ का ख़तरा और बढ़ चुका है। लिहाज़ा शुक्रवार का दिन यमुना से लगनेवाले तमाम इलाकों के लिए ख़तरे का दिन है।

दिल्ली में यमुना 22 किलोमीटर के दायरे में बहती है और इस दायरे में आते हैं करावल नगर, सोनिया विहार, खजूरी खास, तीमारपुर, शास्त्री पार्क, गांधी नगर, गीता कॉलोनी, वज़ीराबाद, शास्त्री नगर, लक्ष्मी नगर, शकरपुर, गणेश नगर, पांडव नगर, खेल गांव, अक्षरधाम, मयूर विहार फेज़-1, त्रिलोकपुरी, चिल्ला गांव, जीवन नगर, महारानी बाग़, फ्रेंड्स कॉलोनी, बाटला हाउस, ओखला, अब्दुल फ़ज़ल एनक्लेव, शाहीन बाग़, मदनपुर खादर और सरिता विहार। सैलाब आया तो इन इलाकों में घरों तक बाढ़ का पानी पहुंच सकता है। हथिनीकुंड बैराज से शाम चार बजे करीब 6 लाख क्यूसे पानी छोड़ा गया है जो 72 घंटों में दिल्ली पहुंचेगा और शुक्रवार सुबह से ही यमुना में उफान आ सकता है। इस बावत दिल्ली सरकार को सूचित किया जा चुका है और यमुना के आस- पास के इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया गया है।

हालांकि दस दिन पहले भी यमुना के निचले इलाकों में बाढ़ के हालात पैदा हो गए थे और तभी लोगों को वहां से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। जिसके बाद वे फिलहाल राहत शिविरों में रह रहे हैं। ख़तरा सिर्फ दिल्ली तक नहीं है। दिल्ली से सटे नोएडा में भी सैलाब का ख़तरा है और कई गावों में लोग इसे लेकर डरे हुए हैं। लेकिन यहां प्रशासन को फिक्र ही नहीं है। नोएडा ने कभी सैलाब नहीं देखा। लेकिन यमुना इस बार नोएडा को भी डराने लगी है। जिस तरह से यमुना ने 10 दिन पहले दिल्ली को अपना गुस्सा दिखाया था उससे तो यही लगता है कि हथिनीकुंड बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद ख़तरा महज़ दिल्ली तक नहीं नोएडा और ग्रेटर नोएडा के भी कई गांवों पर भी है।

कालिंदी कुंज के बाद यमुना का सफर नोएडा में शुरू होता है और यमुना से लगनेवाले तमाम गांवों में ऐसा ही डर है। हालांकि प्रशासन ने अभी तक एहतियातन कोई क़दम नहीं उठाए हैं। ना ही इन इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है। फिर भी जिस तरह से यमुना का जलस्तर बढ़ता जा रहा है। यहां के लोगों की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। गांववालों की चिंता वाजिब है। यमुना में जितना पानी आ रहा है वह किसी सरहद को माननेवाला नहीं है। ऐसे में ख़तरा सिर्फ दिल्ली तक नहीं है। यमुना के किनारे बसे हर गांव, हर शहर, हर इलाके में है। और अगर स्थानीय प्रशासन नींद से नहीं जाग रहा तो कम से कम नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी को तो इधर ध्यान देना चाहिए।

ऊधर जम्मू में तवी नदी में अचानक सैलाब आया और सैलाब में फंस गईं 11 ज़िंदगी। करीब 5 घंटे तक सभी मौत से जंग लड़ते रहे और आर्मी के जांबाज़ जवानों ने किसी तरह से इनकी जान बचाई। सैलाब के बीच जंग, कुदरत से लड़ता इंसान, पानी की शक्ल में मौत और मौत के मुंह में 11 ज़िंदगी। यही नाज़ारा है जम्मू के तवी नदी का जिसमें अचानक उफान आया और सैलाब की चपेट में आए 11 लोग। जम्मू के बाहरी इलाके बेलीचराना में ये लोग ट्रैक्टर लेकर उतरे थे नदी से रेत और पत्थर निकालने, लेकिन अचानक कुदरत ने हमला बोल दिया।

नदी में सैलाब आ गया और सैलाब में 8 ट्रैक्टर- ट्रालियों के साथ 11 लोग फंस गए। करीब 5 घंटे तक मौत से लड़ते रहे, कुछ जांबाज़ युवक मज़दूरों को बचाने पहुंचे लेकिन वह भी सैलाब के बीच में फंस गए। बाद में आर्मी के जवान आए और इन लोगों को निकालने का ऑपरेशन शुरू किया गया। एक- एक कर के सभी को सैलाब से बाहर निकाल लिया गया। हालांकि पानी का बहाव इतना तेज़ था कि रेस्क्यू ऑपरेशन में परेशानी हो रही थी। लेकिन सेना के जांबाज़ जवानों ने सबको मौत के मुंह से बाहर खींच लिया। वहीं एक स्थानीय परिवार का कहना है कि उनका बेटा तवी नदी में मछली पकड़ने गया था कि अचानक आई बाढ़ उसे बहा ले गई। सेना की टीम उसे भी तलाश रही है।

यूपी के सहारनपुर तक हथिनीकुंड से निकला पानी पहुंच चुका है और यहां के गांवों में पानी घुस चुका है। लेकिन जब ये पानी यहां की नदी तक पहुंचा तीन लोग सैलाब के बीच में फंस गए। किसी तरह से उन्हें सेना के हेलिकॉप्टर ने बाहर निकाला। वहीं करनाल में दर्जनों गांव सैलाब में डूब चुके हैं। सेना का हेलीकॉप्टर आया तीन ज़िंदगियों को बचाने। हथिनीकुंड बराज से अचानक पानी छोड़े जाने की वजह से हरियाणा के सहारनपुर के धोलरा गांव में तीन किसान पानी में फंस गए थे। ये तीनों किसान बुधवार की शाम यहां सैलाब के बीच में घिर गए और एक टापू पर रुके रहे। बुधवार को जब इन्हें स्थानीय प्रशासन बाहर नहीं निकाल पाया तब जाकर सेना का हेलीकॉप्टर मंगाया गया। जिसने गुरुवार सुबह रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। शुरुआत में तो तीनों किसान हेलिकॉप्टर में बैठने से डरते रहे और उससे दूर भागते रहे लेकिन बाद में उन्हें किसी तरह चॉपर में बिठाकर सैलाब से बाहर निकाला गया।

यमुनानगर से आगे करनाल में भी हथिनीकुंड से निकले पानी ने तबाही मचा रखी है। 6 लाख क्यूसेक पानी यहां सैलाब बन कर आया और करनाल और पानीपत ज़िले के दर्जनों गांवों को समंदर में तब्दील कर दिया। यमुना से किनारे लगनेवाले गांवों में इतना पानी है कि उसमें घर डूब चुके हैं कच्चे मकान बह चुके हैं और हज़ारों एकड़ फसल बर्बाद हो चुकी है। अचानक आई बाढ़ से आशंका जताई जा रही है कि कई लोग डूब चुके हैं जबकि अधिकतर लोग जान बचाकर सड़क तक पहुंच गए।

सड़कों पर भी 4- 4 फुट पानी है। नाबियाबाद, कल्सोरा और आस- पास के गांवों का तो सड़कों से सम्पर्क भी टूट चुका है। गांववाले प्रशासनिक रवैये से नाराज़ हैं और जब मौके पर प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे तो गांववालों ने उन्हें घेर लिया। अधिकारी खाली हाथ ही इन इलाकों में पहुंच गए थे। राहत और बचाव कार्य के लिए उनके पास कुछ नहीं था और अभी तक पीड़ितों को राहत सामग्री तक नहीं पहुंचाई गई। मौजूदा वक़्त में इन लोगों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत रहने और खाने की है जो कुछ भी इनके पास था वह बाढ़ में बह चुका है और आसमान से बादलों की फौज रुक रुक कर बारिश कर रही है।

अम्बाला के भी दर्जनों गांवों में बाढ़ आ चुकी है और लोग यहां से पलायन करने को मजबूर हैं। ट्रैक्टर पर लदे लोग अपनी ज़िंदगी समेट कर सैलाब से दूर जा रहे हैं। इनका गांव बाढ़ में डूब चुका है। ज़िंदगी का एक- एक हिस्सा पानी में समा चुका है। ऐसे में अब यहां पर रहना ठीक नहीं है। अम्बाला के करीब एक दर्जन गांवों का यही हाल है। मारकंडा नदी में तीन जगहों पर दरार आ गई और 10- 12 गांव सैलाब में डूब गए। सब कुछ चौपट हो गया।

सड़कों तक पर कमर के ऊपर तक पानी है। कहीं आना- जाना किसी युद्ध से कम नहीं। लेकिन हालात ऐसे नहीं हैं कि लोग कुदरत से लड़ सकें। घरों में पानी घुस चुका है। खाने- पीने के लिए कुछ नहीं बचा है। फसल तबाह हो चुकी है। खेत समुद्र में तब्दील हो चुके हैं। इतनी मुसीबतों के बीच भी कुदरत अभी रहम करने के मूड में नहीं दिखती। पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा है और प्रशासनिक अमला जाने कहां है। कहीं भी कोई सरकारी नुमाइंदा दिखाई नहीं देता। लोग आपस में ही एक- दूसरे की मदद कर रहे हैं और अपनी ज़िंदगी को दुबारा समेटने की कोशिश में लगे हुए हैं।

मैक्सिको में भी सैलाब आया है। यहां भारी बारिश के बाद दक्षिणी मेक्सिको को खाली कराया जा रहा है। चिआपस, तबास्को, ऑक्सका प्रांतों से सैकड़ों परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। भारी बरसात की वजह से यहां की सभी प्रमुख नदियां उफान पर हैं और रिहायशी इलाकों में बाढ़ के हालात पैदा हो गए हैं। जिसके चलते हज़ारों लोगों को यहां से बाहर निकाला गया है। इससे कम से कम एक लाख मेक्सिकन परिवार प्रभावित हुए हैं। घर पानी में बह चुके हैं। ऊधर दक्षिण- पूर्वी मेक्सिको में भी अलर्ट जारी कर दिया है, क्योंकि हरमिन तूफ़ान कभी भी इस इलाके में पहुंच सकता है।

अमेरिका भी सैलाब से संघर्ष कर रहा है। यहां के डलास और टेक्सास में लोगों के घरों में पानी घुस चुका है। हरमेन तूफान के साथ आई बारिश की वजह से पूरा इलाका बाढ़ में डूब चुका है। लोगों ने अपनी छतों पर शरण ली है। हज़ारों लोगों को सैलाब के बीच से बाहर निकाला गया है। लेकिन अभी भी हज़ारों लोग इसमें फंसे हुए हैं। बाढ़ की वजह से सड़क से सम्पर्क टूट चुका है। बिल्डिंग्स में पानी भर चुका है और लोगों के पास खाने के लिए भी कुछ नहीं बचा है। अमेरिकी सरकार राहत और बचाव कार्य में लगी हुई है।

ऑस्ट्रेलिया का विक्टोरिया प्रांत भी सैलाब के संकट से जूझ रहा है। यहां के शेपार्टन में कम से कम 600 घर पानी में डूब टुके हैं और इनका बाकी जगहों से सम्पर्क टूट चुका है। हालांकि इलाके के लोग इस बाढ़ के लिए पहले से तैयार थे और उन्हें यहां से बाहर निकालने की ज़रूरत नही पड़ी। ऑस्ट्रेलियन डिफेंस फोर्स ने करीब 65 हज़ार रेत के बोरे मेक्सिको भेजे हैं जिन्हें प्रभावित इलाकों तक पुहंचाया जा रहा है।

 

 

 

 रेटिंग दें
 Rating: 0.0 out of votes cast


आपकी राय 



नाम:
ई-मेल  


आपकी राय 

देश

 

दुनिया

 

कारोबार

 

खेल

 

मनोरंजन